नवभारत संपादकीय: शादी के कार्ड पर जन्मतिथि अनिवार्य? क्या इससे रुक पाएंगे बाल विवाह

Child Marriage Prevention: शादी के निमंत्रण पत्र पर वर-वधु की जन्मतिथि अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर बहस तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता व शिक्षा अधिक प्रभावी उपाय है।
Navbharat Editorial: Date of birth mandatory on wedding cards? Will this curb child marriage?
बाल विवाह,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Wedding Card Birthdate Rule: जस्थान के पैटर्न पर महाराष्ट्र सरकार विचार कर रही देश है कि शादी की निमंत्रण पत्रिकाओं पर वर-वधु की जन्मतिथि छापना अनिवार्य करने से राज्य में बाल विवाह रोकने में मदद मिलेगी? यह प्रस्ताव कितना असरकारक रहेगा? इसके समर्थकों की राय है कि इससे वर-वधु की सही उम्र लोगों को मालूम हो जाएगी और यदि कोई नाबालिग है तो विवाह रोका जा सकेगा।

राजस्थान में अब भी प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया पर कितने ही बाल विवाह होते हैं लेकिन क्या उस पर पुलिस या सक्षम अधिकारी रोक लगा पाए हैं? गरीब, आदिवासी व पिछड़े वर्ग के कितने ही लोग विवाह की पत्रिका भी नहीं छपवाते हैं और सिर्फ निकट के रिश्तेदारों को सूचना देकर काम चला लेते हैं। यदि पत्रिका छपवाई गई तो उसमें गलत जन्मतारीख भी तो डाली जा सकती है।

बाल विवाह रोकने के लिए कानून के साथ सामाजिक सोच बदलना भी जरूरी

वह सही है या गलत, इसका पता कैसे लगाया जाएगा? यह सोचना गलत है कि शादी का निमंत्रण पत्र किसी पुलिस थाने या सरकारी कार्यालय में भेजा जाएगा। लोग सिर्फ अपने परिजनों व मित्रों को ही ऐसा कार्ड भेजते हैं। बाल विवाह रोकने के लिए समाज की मानसिकता बदलनी होगी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश इसीलिए है। जहां शिक्षा का प्रसार नहीं है और रूढ़िवादिता चलती आ रही है वहां बाल विवाह का कलंक अब भी कायम है।

ग्रामीणों और गरीबों को अब भी यह लगता है कि बेटी पराया धन है और जितनी जल्दी उसके हाथ पीले कर दिए जाएं, उतना ही अच्छा, ऐसे लोग यह नहीं सोचते कि बेटी को भी बेटे के समान पढ़ा-लिखाकर सक्षम बनाना उनका कर्तव्य है। दोनों के बराबरी के अधिकार हैं। यदि कच्ची उम्र में लड़की की शादी कर दी तो उस पर मातृत्व का बोझ आ जाता है और ऐसे में उसकी जान खतरे में पड़ सकती है। इसलिए कानूनी तौर पर लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है।

बाल विवाह रोकने के लिए उम्र सत्यापन और विवाह पंजीकरण अनिवार्य हो

वास्तव में 21 वर्ष ही लड़के-लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र रहनी चाहिए, विवाह कराने वाले पंडित-पुरोहित पर कानूनी दबाव रहना चाहिए कि वह बाल विवाह संपन्न न कराएं और यदि कहीं ऐसी शादी तय हो रही हो तो समय रहते उसकी सूचना पुलिस या अन्य अधिकारियों को देनी चाहिए। विवाह का पंजीयन भी अनिवार्य कराया जाए। देश में कितनी ही शादियों के बाद उनका पंजीकरण नहीं कराया जाता।

आगे चलकर संपत्ति के बटवारे, उत्तराधिकार या तलाक और गुजारा भत्ता के मामलों में विवाह का कानूनी सबूत रहना अत्यंत आवश्यक है। नाबालिगों का विवाह रजिस्टर्ड हो ही नहीं सकता। राजस्थान में ऐसे भी सामूहिक विवाह समारोह होते आए हैं जिनमें नेता मौजूद रहते हैं। क्या वहां जांच-पड़ताल होती है कि कोई जोड़ा नाबालिग तो नहीं है! विवाह के लिए उम्र की जांच होनी चाहिए, जन्म प्रमाणपत्र या मैट्रिक के प्रमाणपत्र से इसकी पुष्टि की जा सकती है। ऐसे भी कितने लोग हैं जो शादी में जाकर दावत का आनंद तो लेते हैं लेकिन संदेह होने पर भी वर-वधु की आयु के बारे में नहीं पूछते।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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