

US India Extradition Treaty: अमेरिका भारत से मांग करने जा रहा है कि कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को उसके हवाले किया जाए, भारत और अमेरिका के बीच 1997 में प्रत्यावर्तन संधि हस्ताक्षरित हुई थी जिसके मुताबिक हत्या, आतंकवाद, बंधक बनाने व नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले ऐसे अपराधी को सौंपने की संबंधित देश मांग कर सकता है जिसने दोनों देशों में अपराध किया हो।
जरूरी नहीं है कि हर बार यह मांग मान ली जाए। भारत ने भोपाल गैस कांड के बाद अमेरिका भाग निकले यूनियन काबाईड के प्रमुख वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की मांग की थी लेकिन अमेरिका ने सबूतों की कमी का मुद्दा उठाकर एंडरसन को सौंपने से इनकार कर दिया था।
इसी तरह भारत में हुए 26/11 के आतंक हमलों के साजिशकर्ता व रेकी करने वाले डेविड कोलमैन हेडली को भी अमेरिका ने यह कहकर भारत के हवाले नहीं किया था कि अपराध कबूल करने को लेकर प्ली बार्गेनिंग समझौता हो चुका है। अब वह अमेरिका में अपनी सजा भुगतेगा। केवल 26/11 के अभियुक्त तहव्वर राणा को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अमेरिका से भारत लाया जा सका।
जहां तक लॉरेंस बिश्नोई का मामला है, वह गुजरात के जेल में कैद है। यह बात अलग है कि उसके इशारे पर अब भी उसके गुर्गे हमले और हत्याओं को अंजाम देते हैं। चाहे गायक सिद्धू मूसावाला की हत्या हो या महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी की, उंगलियां लॉरेंस बिश्नोई पर ही उठीं।
सलमान खान भी उससे खतरा महसूस कर रहा है। फिलहाल देखा जाए तो अमेरिका का न्याय विभाग प्रत्यार्पण निवेदन अपने विदेश विभाग के जरिए भारत के विदेश मंत्रालय को भेजेगा। विदेश मंत्रालय इस बारे में गृह मंत्रालय की राय लेगा।
यदि केंद्र सरकार को लगेगा कि इस निवेदन में दम है तो वह उसे भारतीय न्यायालय के सम्मुख पेश करेगी। वहां देखा जाएगा कि क्या प्रत्यावर्तन संधि की शर्ते पूरी होती हैं। तब अदालत अपने निष्कर्ष केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगी। अंततः यह केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा कि यह लॉरेंस बिश्नोई को अमेरिका प्रत्यार्पित करे या न करे।
भारत यह भी कह सकता है बिश्नोई को यहीं पर जेल में सजा भुगतनी होगी। इसके बाद ही उसके प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा। भारत को बिश्नोई के प्रत्यर्पण के लिए बाध्य नहीं किया सकता। विकास यादव का मामला एक मिसाल है।
जब अमेरिकी अभियोजनकर्ताओं ने आरएंडएडब्ल्यू (रॉ) के पूर्व अधिकारी विकास यादव पर खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप लगाया था तो दिल्ली पुलिस ने यादव पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया उस पर भारत में कानूनी कार्रवाई होगी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा