व्हाइट हाउस में भुलक्कड़ का क्या काम, बाइडेन भूल गए मोदी का नाम

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की स्मरणशक्ति फिर दगा दे गई। वह प्रधानमंत्री मोदी का नाम भूल गए। डेलावेयर में क्वाड नेताओं के साथ स्टेज पर खड़े बाइडेन ने मोदी की ओर देखते हुए कहा कि मैं अब किसका परिचय करा रहा हूं, मेरे सामने कौन है! इतना बोलकर वह रुक गए। वक्त पर मोदी का नाम उन्हें याद नहीं आया। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस भूलने वाली बीमारी को 'निशानेबाज' ने निशाने पर लिया है।
जो बिडेन व्हाइट हाउस में पीएम नरेंद्र मोदी का नाम भूल गए
(डिजाइन फोटो)
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पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की स्मरणशक्ति फिर दगा दे गई। वह प्रधानमंत्री मोदी का नाम भूल गए। डेलावेयर में क्वाड नेताओं के साथ स्टेज पर खड़े बाइडेन ने मोदी की ओर देखते हुए कहा कि मैं अब किसका परिचय करा रहा हूं, मेरे सामने कौन है! इतना बोलकर वह रुक गए। वक्त पर मोदी का नाम उन्हें याद नहीं आया। इसके पूर्व जुलाई में नाटो देशों के सम्मेलन में बाइडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का उल्लेख व्लादीमीर पुतिन कह कर किया था। अमेरिका की त्रासदी है कि ऐसा भुलक्कड़ व्यक्ति 20 जनवरी तक व्हाइट हाउस में रहेगा। फिर नया राष्ट्रपति वहां रहने आएगा।’’

हमने कहा, ‘‘भूलना एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है। अपने फिल्मी गीतों में भी इसका उल्लेख है। आपने गीत सुने होंगे- तुम अगर भूल भी जाओ तो ये हक है तुमको, मेरी बात और है, मैंने तो मोहब्बत की है! दोनों ने किया था प्यार मगर, मुझे याद रहा तू भूल गई ओ मेरी महुआ! इन कसमों को, इन रसमों को, इन रिश्ते-नातों को मैं ना भूलूंगा, मैं ना भूलूंगी! भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना, जमाना खराब है, दगा नहीं देना जी दगा नहीं देना।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशोबाज, किसी भी नेता की स्मरणशक्ति अच्छी रहनी चाहिए। लोकमान्य तिलक यदि किसी पुस्तक का एक पन्ना पढ़ लेते थे तो किताब अलग रखने के बाद एक-एक शब्द वैसा ही सुना देते थे। इसी तरह लाला हरदयाल की मेमोरी बहुत तेज थी। गणितज्ञ शकुंतला देवी की याददाश्त भी लोगों को हैरत में डाल देती

हमने कहा, ‘‘आपने शकुंतला का नाम लिया तो हमें भुलक्कड़ राजा दुष्यंत की याद आ गई। दुष्यंत ने कण्व ऋषि के आश्रम में जाकर शकुंतला से गंधर्व विवाह किया था। इसके बाद वह अपनी राजधानी लौट आए। जब गर्भवती शकुंतला को साथ लेकर आश्रमवासी दुष्यंत के पास गए तो उसने शकुंतला को पहचानने से इनकार कर दिया और सबूत मांगा। दुष्यंत ने शकुंतला को निशानी के रूप में राजमुद्रा वाली अंगूठी दी थी जो शकुंतला के नहाते समय नदी में गिर गई थी। उस अंगूठी को मछली निगल गई। मछुआरों को मछली के पेट से वह अंगूठी मिली तो राजा को देने गए।’’

हमने कहा, ‘‘अंगूठी देखते ही दुष्यंत को शकुंतला की याद आ गई। उसने सम्मानपूर्वक शकुंतला को बुलवा लिया। दुष्यंत और शकुंतला के प्रतापी पुत्र का नाम भरत था। भरत के नाम पर ही अपने देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। सूर्यपुत्र कर्ण को भी उनके गुरू परशुराम ने शाप दिया था कि जब अवसर पड़ेगा तब दिव्य शस्त्र चलाने की विद्या भूल जाएगा। ऐसा ही हुआ और अर्जुन ने कर्ण को मार डाला। वर्तमान समय में भूलने की बीमारी को अल्जाइमर कहा जाता है। बाइडेन के पहले पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन भी अल्जाइमर से पीड़ित हो गए थे। हम तो कहते हैं कि दिमाग काम न करे तो तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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