

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय इस अहसास होने के बाद लिया गया कि पिछले 100 वर्षों में सभी जंगली बाघों में से 97% विलुप्त हो गए हैं। दुनिया के 70% बाघ भारत में पाए जाते हैं। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के कॉर्बेट में सबसे ज्यादा 231 बाघों की गणना हुई है। वहीँ भारत में 50 टाइगर रिजर्व हैं। बाघ की दहाड़ तीन किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है। बाघों की नौ उप-प्रजातियां हैं, जिनमें से तीन विलुप्त हो चुकी हैं।
एक बाघ की उम्र जंगल में लगभग 20 साल की होती है। वहीं बाघों की टांगे इतनी मजबूत होती है कि यह मरने के बाद भी कुछ समय के लिए खड़े रह सकते हैं।
बाघ के शरीर पर पाए जाने वाली धारियां भी हमारे फिंगरप्रिंट की तरह यूनिक होती हैं। वहीं एक बाघ का वजन 300 किलो होता है, जिसमें से 300 ग्राम का उनका दिमाग होता है। बाघ का मनपसंद शिकार जंगली सूअर, भैस और हिरण है। यह ज़्यादातर रात में शिकार करते हैं, क्योंकि रात में इनके देखने की क्षमता इंसानों के मुकाबले 6 गुना बढ़ जाती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि जितने बाघ जंगल में नहीं उतने लोगों ने उन्हें पाल रखे हैं।
नर बाघ और मादा शेर के संबंध के बाद जन्में बच्चे को "Tigons" कहा जाता है। वहीं मादा बाघ और नर शेर के संबंध से जन्में बच्चे को "Ligers" कहा जाता है। एक बाघ एक रात में लगभग 27 किलो मीट खा सकता है। वहीं इनके शरीर का हर एक भाग, मूंछ से लेकर पूंछ तक बाजार में बेचना गैरकानूनी है। बिल्ली का DNA भाग से लगभग 95.6% मिलता है। बाघ को बिल्ली की बड़ी प्रजाति भी कहा जाता है।
बाघ 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से भाग सकते हैं। जबकि यह अच्छे तैराक भी होते हैं। वह छः किलोमीटर लगातार तैर भी सकते हैं। बाघों की पीछे वाली टांगें, आगे वाली टांगों से लंबी होती है और इसी वजह से वह तेज दौड़ने, कूदने और शिकार करने में सक्षम होते हैं। टाइगर के बच्चे जब जन्म लेते हैं। उस समय वह अंधे होते हैं। जबकि सामान्यतया केवल आधे शावक ही बड़े होने तक ज़िंदा बच पाते हैं। बाघ स्वभाव से शांत होते हैं। शेरों की तुलना में यह काफी विनम्र जानवर मानें जाते हैं। वह अक्सर अपना शिकार भी दूसरे बाघों और अन्य जानवरों के लिए छोड़ देते हैं। टाइगर के शरीर पर कानों के पीछे सफ़ेद रंग के धब्बे बने होते हैं जो शावकों को जंगल में उनकी माँ को पहचानने में मदद करते हैं।