

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, हिंदी में ‘आप’ शब्द सम्मानसूचक है. हिंदी प्रदेशों में तू-तड़ाक जैसी भाषा अच्छी नहीं समझी जाती. लखनऊ की तमीज और तहजीब के कायल 2 लोग ट्रेन के डिब्बे में चढ़ने के लिए एक-दूसरे से ‘पहले आप-पहले आप’ कहते रहे. ऐसे में गाड़ी छूट गई और दोनों प्लेटफार्म पर खड़े रह गए.’’
हमने कहा, ‘‘लखनऊ में योगी का योग दूसरी बार भी सिद्ध हो गया. लगातार दूसरी बार उनकी सरकार आ गई. तारीफ के काबिल हैं केजरीवाल, जिन्होंने बहुत सोच-समझकर अपनी पार्टी का नाम ‘आप’ रखा. पंजाब की जनता ने कांग्रेसियों और अकालियों की छुट्टी कर दी और केजरीवाल की पार्टी को भारी बहुमत देते हुए कहा- आप मुझे अच्छे लगने लगे, सपने सच्चे लगने लगे! कॉमेडियन से मुख्यमंत्री बनने जा रहे आप नेता भगवंत मान ने पंजाब की जनता का आभार मानते हुए कहा होगा- आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे, दिल की ऐ धड़कन ठहर जा, मिल गई मंजिल मुझे.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कांग्रेस और अकाली नेताओं ने दिल्ली से पंजाब में एंट्री मारने वाले आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल को घूरते हुए कहा होगा- आप यहां आए किसलिए? अरविंद ने जवाब दिया होगा- आपने बुलाया इसलिए. इसके बाद केजरीवाल ने पंजाब की जनता की ओर मुखातिब होकर कहा होगा- आपकी निगाह ने कहा तो कुछ जरूर है, मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कसूर है?’’
हमने कहा, ‘‘आप के झाडू ने पंजाब में सभी पार्टियों को साफ कर दिया. यह झाडू वाला आप वैक्यूम क्लीनर का बाप निकला. ऐसा साफ किया कि चन्नी, सिद्धू, अमरिंदर, बादल सभी देखते ही देखते डस्टबिन में समा गए.’’
हमने कहा, ‘‘आप का कारवां यहीं नहीं रुकेगा. अपनी सफलता से केजरीवाल ने ममता और केसीआर जैसे नेताओं को पीछे छोड़ दिया. अब 2024 के लिए जो गैर कांग्रेसी विपक्षी गठबंधन बनेगा, उसमें कांग्रेस की पनौती या लायबिलिटी नहीं रहेगी. ऐसे गठबंधन का नेतृत्व करने में केजरीवाल अग्रणी होंगे. इस ‘आप’ नेता के लिए जनता भी कहेगी- जाइए, आप कहां जाएंगे, ये नजर लौट के फिर आएगी.’’