भूत दर्ज कराने लगा बयान, उत्तरप्रदेश पुलिस के कारनामे से जज भी रह गए हैरान

उत्तरप्रदेश पुलिस ने ऐसा कारनामा किया है जिससे जज भी हैरान रह गए। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति ने अपने मरने के 3 वर्ष बाद पुलिस थाने में एफआईआर लिखवाई और बयान भी दर्ज कराया। इसके आधार पर अभियुक्त के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई।
भूत दर्ज कराने लगा बयान, उत्तरप्रदेश पुलिस के कारनामे से जज भी रह गए हैरान
(डिजाइन फोटो)
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पड़ोसी ने हमसे कहा, "निशानेबाज, हमें बताइए कि क्या सचमुच भूत-प्रेतों का अस्तित्व होता है या यह सिर्फ मनगढ़ंत बातें हैं?"

हमने कहा, "भारत ही नहीं, पश्चिमी देशों में भी भूतों का अस्तित्व माना जाता है। कुछ ऐसे भी मकान होते हैं जो भूतिया मकान या हांटेड हाउस कहलाते हैं और लोग वहां जाने से डरते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों में माना जाता है कि जिनकी इच्छाएं अतृप्त रह जाती हैं और जो महापापी होते हैं, ऐसे लोगों की मुक्ति नहीं होती और वह भूत बन जाते हैं। इसीलिए मृतकों के श्राद्ध का विधान है। भूत भगवान शिव के गण होते हैं इसलिए उन्हें भूतनाथ भी कहा जाता है। हनुमान चालिसा में लिखा है- 'भूत-पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे।' दूसरी ओर विज्ञान कहता है कि भूतप्रेत सिर्फ भयभीत या आशंकित मन की कल्पना है। भूत का अस्तित्व प्रमाणित नहीं हो सका है।"

पड़ोसी ने कहा, "निशानेबाज, उत्तरप्रदेश पुलिस ने ऐसा कारनामा किया जिससे जज भी हैरान रह गए। एक व्यक्ति ने अपने मरने के 3 वर्ष बाद एफआईआर लिखवाई और बयान भी दर्ज कराया। इसके आधार पर अभियुक्त के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई। 2011 में मरे उस शिकायतकर्ता ने 19 दिसंबर 2023 को वकालतनामे पर दस्तखत भी किए। इस प्रकरण से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सौरभ श्याम शमशेरी भी चकित रह गए। उन्होंने इस केस को रद्द कर दिया और जांच अधिकारी के खिलाफ एक्शन लेने का कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया। जज ने तीखे शब्दों में कहा कि इस केस के तथ्य से वह अवाक हैं कि किस तरह पुलिस अपराध की विवेचना करती है और 3 साल पहले मर चुके व्यक्ति का बयान दर्ज करती है।"

हमने कहा, "अपने देश में कुछ ऐसे भी मामले सामने आते हैं जब जीवित व्यक्ति को मृत बताकर रिश्तेदार उसकी प्रापर्टी हड़प लेते हैं। उसे खुद को जीवित साबित करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। किसी की मौत छुपाकर उसके नाम पर बैंक में आनेवाली पेंशन राशि भी धूर्त लोग उठाते चले जाते हैं। समय चक्र को बताते समय वर्तमान काल और भविष्यकाल के साथ भूतकाल की चर्चा भी होती है। जब नेता या मंत्री अपना पद खो देता है तो उसे भूतपूर्व कहा जाता है।"

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