अनोखा अनुभव पाया ब्रिटिश पीएम जानसन ने चरखा चलाया

Nishanebaaz
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पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, महात्मा गांधी ने जिस चरखे के जरिए देशवासियों को स्वावलंबन की सीख देकर अंग्रेजों को भारत से भगाया, उसी चरखे में अंग्रेज अब रुचि लेने लगे. मैनचेस्टर और लिवरपूल की मिलों में बने विदेशी वस्त्रों का बापू ने बहिष्कार करवाया था. इन कपड़ों की होली जलाई गई और इनकी जगह चरखे से निर्मित मोटी खुरदुरी खादी को देशवासियों ने अपनाया था. आजादी की लड़ाई में अहिंसा और सत्याग्रह के साथ ही खादी का बहुत बड़ा योगदान था. खादी पहनना साहस का काम था. खादीधारी का एक कदम जेल में रहा करता था.’’

हमने कहा, ‘‘इतना पुराना इतिहास आप हमें शायद इसलिए बता रहे हैं क्योंकि देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. भारत में इतनी स्वदेशी मिलें बन चुकी हैं कि खादी सिर्फ करोड़पति नेताओं तक सीमित रह गई है. सफेद वस्त्र धारण कर काले धंधे करनेवालों की कमी नहीं है.’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कोई कल्पना नहीं कर सकता कि जिस ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने महात्मा गांधी को ‘नंगा फकीर’ कहा था, उसी ब्रिटेन के वर्तमान प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान साबरमती आश्रम में चरखा चलाया. हमेशा चेयर पर बैठने वाले जानसन चरखा चलाने के लिए पालथी मारकर बैठे. यह वही चरखा है जिसने अंग्रेजों के होश ठिकाने लगा दिए थे. स्वाधीनता आंदोलन के समय सारे देश में गांधी की आंधी थी. हर स्वतंत्रता प्रेमी अपने घर में चरखा चला रहा था. आपने फिल्मी गीत सुना होगा- चप्पा-चप्पा चरखा चले!’’

हमने कहा, ‘‘जानसन ने बड़े कौतुहल से स्पिनिंग व्हील या चरखा चलाया होगा और समझा होगा कि इसके माध्यम से आजादी कैसे आई. इसके जरिए महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ा मिलों का धंधा चौपट कर दिया था.’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘जानसन को इम्प्रेस करने के लिए उन्हें पुरानी फिल्म ‘जागृति’ का कवि पं. प्रदीप का वह गीत सुनाना चाहिए था- दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल! पुराने नेता चरखा चलाते थे जबकि आज के नेता घपले-घोटाले व मौकापरस्ती का चक्कर चलाते हैं.’’

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