Explainer: 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, पीएम मोदी का दावा कितना सच?

Poverty In India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। जानिए इस दावे की सच्चाई और भारत में गरीबी रेखा के बदलते पैमाने की पूरी कहानी।
pm narendra modi claim 35 crore people get out of poverty
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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Highlights:

  • पीएम मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

  • पीएम ने बताया कि 2014 से पहले देश में केवल 100 स्टार्टअप थे, अब इनकी संख्या काफी बढ़ चुकी है।

  • साल 2011-12 के बाद से आज तक किसी कमेटी द्वारा भारत में गरीबी रेखा तय नहीं की गई है।

PM Narendra Modi Claim On Poverty: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ है और 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं। वह नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित कर रहे थे, जो पहली बार भारत में हो रहा है। तीन दिन का यह इवेंट 15 अक्टूबर को खत्म होगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर साल, यह फोरम दुनिया के सबसे अच्छे दिमागों को एक साथ लाता है। इस साल, पहली बार, यह इवेंट भारत में हो रहा है। मैं इसके लिए ब्लूमबर्ग और पूरी टीम को बधाई देता हूं।

'25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की स्टार्टअप यात्रा इस बदलाव का उदाहरण है। 2014 से पहले, भारत में 100 स्टार्टअप थे; अब उनसे ज्यादा हैं। इनमें से आधे छोटे शहरों में हैं। इसका मतलब है कि इनोवेशन के मौके ज्यादा लोगों तक पहुंच रहे हैं। नया टैलेंट उभर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि शासन में सत्ता का उद्देश्य पर ध्यान देना जरूरी है। सरकार के पास पावर है, लेकिन इससे नागरिकों को उस पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत पर चलते हुए भारत ने एक दशक में 250 मिलियन (25 करोड़) लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। आइए जानते हैं इस दावे का असली सच।

भारत में गरीबी का पैमाना क्या है?

भारत में समय-समय पर गरीबी रेखा को परिभाषित किया जाता रहा है। साल 2011-12 में पर कैपिटा कंजम्पशन के आधार पर जो गरीबी रेखा थी उसके बाद से आज तक गरीबी रेखा तय नहीं की गई है। 2025 से 2009 के बीच तेंदुलकर कमेटी ने जो गरीबी रेखा तय की थी। वहीं, गरीबी रेखा 2011-12 तक चल रही थी।

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भारत कैसे तय होती है गरीबी रेखा?(सोर्स- AI जेनरेटेड इमेज)

तेंदुलकर कमेटी ने जो गरीबी रेखा तय की थी वह बहुत ही कम थी। इस कमेटी ने गांव और शहर के किसी एक व्यक्ति को कितनी न्यूट्रिशन और कैलोरी की जरूरत होती है, केवल इसे ही आधार बनाया था। इसी वजह से तेंदुलकर कमेटी की काफी आलोचना होती थी।

तेंदुलकर कमेटी की आलोचना क्यों?

आलोचकों का यह तर्क था कि किसी व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों सिर्फ पोषण ही नहीं होता है। केवल आप कैलोरी का अनुमान लगाकर या कैलोरी का निर्धारण करके आप ये तय नहीं कर पाएंगे कि कौन गरीब है और कौन नहीं है, बल्कि उसके साथ-साथ कपड़ा शिक्षा स्वास्थ्य जैसे विषय भी बुनियादी जरूरत के अंतर्गत ही आते हैं।

2014 में रंजराजन कमेटी की सिफारिश

तेंदुलकर कमेटी की आलोचना के बाद रंगराजन कमिटी बनी। रंगराजन कमेटी ने व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों में पोषण के साथ-साथ न्यूट्रिशन के साथ-साथ कपड़ा शिक्षा स्वास्थ्य जैसे विषय को भी शामिल किया। इसके आधार पर साल 2014 में रंगराजन कमेटी ने यह सिफारिश की कि शहर में अगर कोई व्यक्ति हर महीने 1,407 रुपये से ज्यादा खर्च करता है तो वह गरीबी रेखा से बाहर होगा। वहीं, अगर गांव में कोई व्यक्ति हर महीने 972 रुपये से ज्यादा खर्च करता है तो वह गरीबी रेखा से बाहर होगा।

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रंगराजन कमेटी ने साल 2014 में सिफारिश दी कि अगर कोई शहरी व्यक्ति दिन भर में 46 रुपये से कम खर्च करता है तो वह गरीब होगा और अगर कोई ग्रामीण व्यक्ति दिन भर में 32 रुपये से ज्यादा खर्च करता है तो वह अमीर होगा।

पीएम मोदी के दावे का असली सच

पीएम मोदी का 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने का दावा नीति आयोग की एक विशेष रिपोर्ट 'Multidimensional Poverty in India since 2005-06' के आंकड़ों पर आधारित है। नीति आयोग ने यह रिपोर्ट ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तकनीकी सहयोग से तैयार की थी।

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पीएम मोदी के दावे का असली सच(सोर्स- सोशल मीडिया)
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पारंपरिक रूप से गरीबी को केवल आय या दैनिक खर्च (जैसे 32 रुपये प्रतिदिन) के आधार पर मापा जाता था। हालांकि, नीति आयोग का यह आंकड़ा 'बहुआयामी गरीबी' पर आधारित है। इसका मतलब है कि व्यक्ति की केवल आय नहीं देखी जाती, बल्कि यह देखा जाता है कि उसे बुनियादी सुविधाओं का अभाव है या नहीं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 से 2022-23 (9 से 10 वर्षों) के बीच देश में लगभग 24.82 करोड़ (करीब 25 करोड़) लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं।

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