

E20 Ethanol Water Consumption: गन्ने से 1 लीटर इथेनॉल बनाने में 3,630 लीटर पानी लगता है, जबकि मक्के से 1 लीटर इथेनॉल निर्मित करने में 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इस तरह देश के जल संसाधनों पर भार पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्वयं कहा है कि ई-20 ईंधन के उपयोग से कैलिब्रेट की गई नई कारों का माइलेज 1 से 2 प्रतिशत घटता है, जबकि पुरानी कारों का माइलेज 3 से 6 फीसदी तक घट जाता है।
मंत्रालय ने गत माह स्पष्ट किया था कि जब कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाता है, तब इथेनॉल का उपयोग किफायती रहता है, लेकिन जब क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल के दाम पर उपलब्ध हो, तब ई-20 का उत्पादन महंगा पड़ने लगता है। सारे भारत में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल खरीदने को ग्राहक बाध्य हैं।
सरकार की दलील है कि पेट्रोलियम आयात घटाने के उद्देश्य से इथेनॉल को बढ़ावा दिया गया है। इथेनॉल सिर्फ स्वदेश में नहीं बनाया जा रहा, बल्कि 2025 से भारत अमेरिका से इथेनॉल आयात कर रहा है। इसका इस्तेमाल फार्मा और केमिकल उद्योग कर रहे हैं, जो पहले भारत की डिस्टिलरीज से इथेनॉल खरीदते थे। अब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से डिस्टिलरीज की कमाई बढ़ी है। तथ्य यह है कि आयातित पेट्रोलियम पर भारत की निर्भरता कम नहीं हुई है।
इथेनॉल की ब्लेंडिग 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किए जाने पर भी क्रूड ऑयल के आयात में वृद्धि हुई है। पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल लगभग दो तिहाई ऊर्जा देता है। एक समय भारत अपने फार्मा और केमिकल उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल आयात करता था। इथेनॉल निर्माण करने के लिए महाराष्ट्र व कर्नाटक ने गन्ना व मक्के का उत्पादन बढ़ा दिया जबकि दलहन, सोयाबीन, मिलेट व कपास का उत्पादन क्षेत्र घटा दिया गया। 2024-25 में 126 लाख टन मक्का डिस्टलरीज में भेजा गया।
मक्के की खेती में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इथेनॉल निर्माण पर जोर दिए जाने से 2024-25 में भारत को 16 मिलियन टन खाद्य तेल विदेश से आयात करना पड़ा। इसके अलावा 7.3 मिलियन टन दाल विदेश से मंगानी पड़ी। पहली बार खाद्य तेल आयात पर 30 गुना अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी। भारत ने ईंधन व गैर ईंधन की मांग की पूर्ति के लिए जरूरत से ज्यादा डिस्टिलरी बना ली है।
इस वजह से अमेरिकी इथेनॉल का आयात, जो कि दिसंबर 2025 में 14.9 मिलियन गैलन था, अप्रैल 2026 में घटकर नहीं के बराबर रह गया। यही वजह है कि फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका संयुक्त घोषणापत्र में मक्का व इथेनॉल का उल्लेख नहीं है। तथापि भारत अमेरिका से पशु खाद्य के तौर पर डिस्टिलरी का सूखा अनाज खरीदने को तैयार है। देश की डिस्टिलरी अब मांग कर रही हैं कि इथेनॉल निर्यात करने, डीजल में इथेनॉल मिलाने तथा खाना पकाने के स्टोव में इथेनॉल के उपयोग की अनुमति दी जाए, बेहतर होगा कि फसलों के ठूंठ (पराली) से इथेनॉल बनाया जाए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा