नवभारत विशेष: ट्रंप 2.0 की हुई शुरुआत, अवैध अप्रवासी भारतीयों की अमेरिका से वापसी तय

शपथ लेने के बाद ट्रंप ने अवैध आप्रवासियों के विरुद्ध एग्जीक्यूटिव आर्डर पर यह कहते हुए हस्ताक्षर किये कि ‘अपनी सीमाओं को हम ऐसी आक्रमकता से सुरक्षित रखेंगे जिसे दुनिया ने पहले कभी देखा न होगा।
नवभारत विशेष: ट्रंप 2।0 की हुई शुरुआत, अवैध अप्रवासी भारतीयों की अमेरिका से वापसी तय
डोनाल्ड ट्रंप (डिजाइन फोटो)
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नवभारत डेस्क: अमेरिका में लाखों की तादाद में बिना कागजात के आप्रवासी हैं, जिनमें से लगभग 7,25,000 भारतीय हैं। ट्रंप की वाइट हाउस में वापसी से इन सभी की सांसें थम सी गई हैं। ट्रंप इस बार अधिक कठोर स्वदेशी एजेंडा के साथ लौटे हैं और अवैध घुसपैठियों को घर वापसी फ्लाइट पर बैठाना चाहते हैं।

शपथ लेने के बाद ट्रंप ने अवैध आप्रवासियों के विरुद्ध एग्जीक्यूटिव आर्डर पर यह कहते हुए हस्ताक्षर किये कि ‘अपनी सीमाओं को हम ऐसी आक्रमकता से सुरक्षित रखेंगे जिसे दुनिया ने पहले कभी देखा न होगा। हम अवैध घुसपैठ हमेशा के लिए रोक देंगें। हमारे यहां कोई घुसपैठ नहीं करेगा, कोई कब्जा नहीं करेगा। हम एक बार फिर आजाद और गौरवशाली देश होंगे।’

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स नये राष्ट्रपति के लिए वह औजार बन गए हैं, जिनके जरिये वह अपने चुनावी वायदों पर जल्द से जल्द अमल करते दिखाई देना चाहते हैं। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स की संख्या चुनावी वायदों की संख्या पर निर्भर करती है। अगर एक राष्ट्रपति ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स पर अधिक निर्भरता दिखायी है तो उसका उत्तराधिकारी यही तरीका अपनाकर उसके आदेशों को निरस्त करता है। ट्रंप ने बाइडेन के 78 आदेशों को ठंडे बस्ते में डाला।

एग्जीक्यूटिव आर्डर का कमाल

हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स व निर्देशों का इस्तेमाल अपने कार्यक्रम लागू करने व नीति को आकार देने के लिए करते हैं, लेकिन अमेरिका के संविधान में कोई प्रावधान विशिष्ट रूप से इन शक्तियों के बारे में कुछ नहीं बताता है। यह स्वीकार कर लिया गया है कि राष्ट्रपति के पास जो पॉवर है उसमें ऐसे आदेश जारी करने के अधिकार स्वतः ही निहित हैं।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स की वैधता राष्ट्रपति प्राधिकरण (अथॉरिटी) के वैध स्रोतों से हासिल करनी होती है। अगर कांग्रेस ऐसा कानून पारित करती है, जिससे राष्ट्रपति को किसी मामले में फैसला लेने का अधिकार प्रदान कर दिया जाये, तो राष्ट्रपति संबंधित मामले में एग्जीक्यूटिव आर्डर जारी कर सकते हैं।

वैध एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स में कानून का बल व प्रभाव होता है लेकिन उन्हें कांग्रेस या न्यायिक एक्शन द्वारा निरस्त या वापस लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त संविधान के तहत कांग्रेस को दी गईं पॉवर्स को एग्जीक्यूटिव आर्डर के प्राधिकार से सीमित किया जा सकता है।

कांग्रेस की विनियोग पॉवर का अर्थ है कि एग्जीक्यूटिव आर्डर के माध्यम से अमेरिकी ट्रेजरी से गठित विनियोग से अधिक फंड नहीं निकाला जा सकता। प्रत्येक राष्ट्रपति को एग्जीक्यूटिव आर्डर में संशोधन करने, निरस्त करने या उसकी जगह दूसरा आर्डर लाने का अधिकार है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपतियों के एग्जीक्यूटिव आर्डर भी शामिल हैं।

अप्रैल 1992 में राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्लू बुश ने एग्जीक्यूटिव आर्डर 12,800 के जरिये फेडरल ठेकेदारों को आदेश दिया कि वह अपने कर्मचारियों को नोटिफाई करें कि कानूनन उन्हें किसी यूनियन का सदस्य बनने की जरूरत नहीं है। फरवरी 1993 में बिल क्लिंटन ने एग्जीक्यूटिव आर्डर 12,836 से इस आर्डर को पलट दिया। फिर फरवरी 2001 में जॉर्ज डब्लू बुश ने एग्जीक्यूटिव आर्डर 13,201 से क्लिंटन के आदेश को बदल दिया, जिसे बराक ओबामा ने जनवरी 2009 में एग्जीक्यूटिव आर्डर 13,496 से एक बार फिर पलट दिया।

नीति बदली भी जा सकती है

अगर कोई नीति एग्जीक्यूटिव आर्डर से गठित होती है, तो उसे एग्जीक्यूटिव आर्डर से ही बदला भी जा सकता है। फिलहाल ट्रंप ने जो कुछ बेतुके एग्जीक्यूटिव आर्डर जारी किये हैं जैसे पेरिस क्लाइमेट ट्रीटी से अमेरिका को बाहर निकाल लेना तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंड न देना।

इससे दुनियाभर में क्लाइमेट और स्वास्थ्य संबंधी शोध व अध्ययन में समस्याएं खड़ी होंगीं। ट्रंप ने एक तानाशाह की तरह गद्दी पर बैठते ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स के नाम पर ऐसे फरमान जारी किये हैं कि हर देश अपने प्लान ए, बी व सी के बारे में सोचने लगा है। भारत भी ट्रंप के ट्रेड, इमीग्रेशन और पश्चिम एशिया व यूक्रेन युद्ध पर निर्णयों की गहरी समीक्षा कर रहा है।

ट्रंप ने भारत व चीन की यात्रा करने के संकेत दिए हैं। इससे यह सवाल तो बनता ही है कि क्या अमेरिका-चीन खेल में भारत को कम वरीयता मिलेगी? दिल्ली को चाहिए कि वह ट्रंप की मनमर्जियों के सामने बैकफुट पर बल्लेबाजी न करे। ट्रंप का बेहतरीन जवाब यही है कि भारत तेजी से विकास करे, हम आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो ग्लोबल राजनीति हमारे इशारों पर नाचेगी।

लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा