निशानेबाज : चुनाव में चर्चा चल पड़ी, हर पार्टी बांट रही रेवड़ी, अब आप पार्टी क्या अपनाएंगी पैंतरा

‘निशानेबाज, सिर्फ रेवड़ी ही गोल नहीं होती नेताओं के वादों में भी गोलमाल रहता है. मतदाता कन्फ्यूजन में पड़ जाता है कि किसकी रेवड़ी कबूल करे! दिल्ली के चुनाव में दिलदारी के साथ रेवड़िया बांटी जा रही हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025, रेवड़ी
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की रेवड़ी (सौ.डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, न तो किसी स्वादिष्ट मिठाई की चर्चा है न महंगी स्विस चाकलेट का जिक्र! किसी भी पकवान की बजाय सारा ध्यान सिर्फ रेवड़ी पर केंद्रित है. ऐसा क्यों?’ हमने कहा, ‘रेवड़ी चुनावी राजनीति का अभिन्न अंग है. गुड़ खानेवाले गुलगुले से परहेज कर सकते हैं लेकिन तिल के लड्डू खानेवाला रेवड़ी से परहेज नहीं कर सकता. चीनी और तिल के गठबंधन से मीठी रेवड़ी तैयार होती है।

गुलाबजल पड़ी हुई सुगंधित रेवड़ी के तो कहने ही क्या? रेवड़ी चपटी भी हो सकती है और गोल भी! मतदाताओं के रेवड़ या झुंड को आकर्षित करना है तो रेवड़ी से बढि़या कोई चीज नहीं है. जिस नेता को हो वोटों से प्यार, वो रेवड़ी से कैसे करे इनकार!’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, सिर्फ रेवड़ी ही गोल नहीं होती नेताओं के वादों में भी गोलमाल रहता है. मतदाता कन्फ्यूजन में पड़ जाता है कि किसकी रेवड़ी कबूल करे! दिल्ली के चुनाव में दिलदारी के साथ रेवड़िया बांटी जा रही हैं. आप, बीजेपी और कांग्रेस कोई भी पीछे नहीं है. सभी ने रेवड़ी के स्टाल लगा रखे हैं।

मतदाता के सामने ऑफर है- यार दिलदार तुझे कैसा चाहिए, प्यार चाहिए कि पैसा चाहिए?’ हमने कहा, ‘प्रेम-स्नेह के साथ कोई पैसा दे तो इससे बढि़या बात और क्या हो सकती है? यह स्नेह किसी को लाडली बहन तो किसी को लाडला भाई बना लेता है. रेवड़ी पाकर खुश होने वाली जनता कहती है- प्यार का बंधन जनम का बंधन, ये बंधन टूटे ना! जनता जनार्दन को मुफ्त में नगद नारायण मिल जाए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता।

ऑफर देनेवाले कह रहे हैं- हमारी रेवड़ी का साइज दूसरे से बड़ा है. नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा दिया था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा. आज के नेता कहते हैं- तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें रेवड़ी दूंगा.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, आपको याद होगा कि बीजेपी ने चाय पे चर्चा शुरू की थी फिर कांग्रेस ने श्रोताओं के लिए खटिया बिछाकर खाट पे चर्चा शुरू की. आज हम लोग सबसे करेंट टॉपिक रेवड़ी पे चर्चा कर रहे हैं. खबरों में कभी रईसजादों या फिल्मी सितारों की रेव पार्टी छाई रहती है तो चुनाव आते ही रेवड़ी चर्चित हो जाती है. रेवड़ी को लेकर हिंदी में कहावत है- अंधा बांटे रेवड़ी, अपने-अपने को दे।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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