

Duty Over Rights Message: पड़ोसी ने हमसे कहा, निशानेबाज हमारा इरादा कर्तव्य पथ पर चलकर सेवातीचं तक पहुंचने का है। इस बारे में आपका क्या सुझाव है?' हमने कहा, 'हर व्यक्ति को अपने कर्तव्य का ध्यान अवश्य दक्षिण में रामेश्वर, पश्चिम में द्वारका, सोमनाथ, पूर्व में जगन्नाथपुरी जा सकते हैं। चारधाम यात्रा में जमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ चले जाइए, स्वस्थ हैं तो अमरनाथ या कैलाश पर्वत की यात्रा कर सकते हैं। प्रयागराज तो तीथों का राजा या रखना चाहिए, बच्चों का कर्तव्य है कि माता-पिता, गुरुजनों की आज्ञा मानें।
हर नागरिक को समाज व देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए आप जहां नौकरी करते हैं और जहां का नमक खाते हैं, वहां पूरी क्षमता और ईमानदारी से ड्यूटी या कर्तव्य पालन कीजिए लोग अधिकार पाना चाहते हैं लेकिन कर्तव्य पर ध्यान नहीं देते। चुनाव के समय वोट डालना हर नागरिक का कर्तव्य है। सड़क पर वाहन चलाते हैं तो ट्रैफिक नियमों का पालन करना कर्तव्य है। अपने बुजुर्ग व बीमार माता-पिता की सेवा व ध्यान रखना भी हर व्यक्ति का कर्तव्य है। आपको कर्तव्य पथ पर जाना हैं तो हमसे पूछने की आवश्यकता नहीं है। चल पड़िए,'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज आप हमारा मतलब ठीक से नहीं समझे। हमें सेवातीर्थ तक जाना है।'
हमने कहा, 'आपके मन में तीर्थयात्रा का विचार आया है, तो देर मत कीजिए, उत्तर में अयोध्या काशी, मथुरा, दक्षिण में रामेश्वर, पश्चिम में द्वारका, सोमनाथ, पूर्व में जगन्नाथपुरी जा सकते हैं। चारधाम यात्रा में जमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ चले जाइए। स्वस्थ हैं तो अमरनाथ या कैलाश पर्वत की यात्रा कर सकते हैं। प्रयागराज तो तीथों का राजा या तीर्थराज कहलाता है। आपने सुना होगा-सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार।'
पड़ोसी ने कहा, "निशानेबाज, समय के साथ अपनी जानकारी बढ़ाइए। अब दिल्ली के राजपथ को 'कर्तव्य पथ' कहा जाने लगा है। इसी तरह प्रधानमंत्री निवास को 'सेवातीर्थ' नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी खुद को 'प्रधान सेवक' कहते हैं। राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और अन्य मंत्रालयों का क्षेत्र, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक को अब तक सेंट्रल विस्टा कहा जाता था। अब इसका नाम 'कर्तव्य भवन' क्षेत्र कर दिया गया है। इसकी घोषणा केंद्रीय शहरी आवास मंत्री मनोहरलाल ने की, जब वह हरियाणा के सीएम थे, तब मनोहरलाल खट्टर कहलाते थे। अब उन्होंने अपना सरनेम खट्टर निकाल दिया और भजनलाल, देवीलाल, बंसीलाल के समान मनोहरलाल कहलाने लगे। आप भी पुराने नाम भूल जाइए और नए नाम याद रखिए।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा