निशानेबाज- छगन भुजबल का साफ-साफ कहना, नहीं हूं किसी के हाथ का खिलौना

राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने से बेहद नाराज हैं। उन्होंने नाम न लेते हुए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को निशाने पर भी लिया। उनके निशाने पर निशानेबाज ने भी निशाना लगा दिया है।
छगन भुजबल ने साफ कहा, मैं किसी के हाथ का खिलौना नहीं हूं
छगन भुजबल (डिजाइन फोटो)
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नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने से बेहद नाराज हैं। उन्होंने नाम न लेते हुए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को निशाने पर लेते हुए कहा कि मुझे क्या खिलौना समझ रखा है? मैं किसी के हाथ में खेलनेवाला नहीं हूं। मैं ऐसा आदमी नहीं हूं जिसे कोई कहे कि यहां उठ, वहां बैठ!’’

हमने कहा, ‘‘खिलौना शब्द से याद आया कि हर इंसान ईश्वर का बनाया हुआ मिट्टी का खिलौना है जिसका भाग्य विधाता रचता है। किसी को हमेशा यश या सफलता नहीं मिलती। किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले किसी को कुछ भी नहीं मिलता। एवरेस्ट पर चढ़नेवाले पर्वतारोही को भी नीचे उतरना पड़ता है। रामायण में कहा गया है- हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश, अपयश विधि हाथ।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आप तो यह भी कहेंगे कि नच विद्या नच पौरुषम भाग्यं सर्वत्र लभेत। न विद्या काम आती है न पौरुष, भाग्य में जो लिखा है वही होता है। इसके बावजूद कर्म का बहुत महत्व है। मनुष्य अपने कर्म से अपनी किस्मत को गढ़ता है। जरा सोचिए कि भुजबल का मतलब आर्मस्ट्रांग होता है और नील आर्मस्ट्रांग वह एस्ट्रोनाट था जिसने 1969 में चंद्रमा पर पहला कदम रखा था।''

पड़ोसी ने कहा, ‘‘इस बारे में आर्मस्ट्रांग ने कहा था- इट इज ए बिग स्टेप ऑफ ए स्माल मैन फ्राम दि अर्थ। मतलब यह पृथ्वी के एक छोटे से इंसान का चंद्रमा के धरातल पर बड़ा कदम था। भुजबल के साथ ओबीसी का बल है। वे भी चाहें तो कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। अजीत पवार ने अपने चाचा शरद पवार का साथ छोड़ा। भुजबल भी चाहें तो अजीत का साथ छोड़ सकते हैं। जहां तक खिलौना शब्द की बात है इसी नाम की फिल्म आई थी जिसमें संजीवकुमार का प्रभावशाली अभिनय था।''

पड़ोसी ने कहा, ‘‘उसका गीत था- खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो। मुझे इस हाल में किस के सहारे छोड़ जाते हो! एक अन्य गीत आपने सुना होगा- रोना कभी नहीं होना, चाहे टूट जाए कोई खिलौना! पुरानी फिल्म चोरी-चोरी के एक गीत में राज कपूर और नरगिस कठपुतली के समान नाचते हैं। उस गाने के बोल थे- जहां मैं जाती हूं वहीं चले आते हो, चोरी-चोरी मेरे दिल में समाते हो, ये तो बताओ कि तुम मेरे कौन हो।’’

हमने कहा, ‘‘भुजबल ने कड़े शब्दों में कह दिया है कि वो किसी के हाथ की कठपुतली या खिलौना नहीं हैं। अब उनके अगले कदम पर सबकी निगाह रहेगी!’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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