नवभारत संपादकीय: 40 हजार फीट पर दहशत: असुरक्षित क्यों होती जा रही विमान यात्रा ?

Flight Safety Concerns: लगातार विमान घटनाओं से यात्री सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। इमरजेंसी लैंडिंग, रनवे टक्कर और तकनीकी खराबियों ने हवाई यात्रा की विश्वसनीयता को चुनौती दी है।
Navabharat Editorial: Terror at 40,000 Feet—Why Is Air Travel Becoming Increasingly Unsafe?
विमान सुरक्षा( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

India Aviation Incidents Safety Issues: विमान यात्रा का यदि विस्तार हो रहा है तो उसके साथ वि यात्रियों की सुरक्षा का प्रश्न भी अत्यंत महत्व एवं प्राथमिकता रखता है। हैदराबाद से कर्नाटक के हुबली जा रही 'फ्लाई 91' की उड़ान को बेंगलुरु में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। जब विमान 40,000 फीट की ऊंचाई पर था, तभी तकनीकी खराबी की वजह से वह लड़खड़ाया और यात्री दहशत में आ गए। 4 घंटे तक विमान हवा में चक्कर लगाता रहा।

एयर इंडिया के अहमदाबाद से लंदन जाने वाले बोइंग 787 विमान की टेक ऑफ के बाद भीषण विमान दुर्घटना तथा अजीत पवार का विमान हादसा होने पर यात्री सुरक्षा का मुद्दा ज्वलंत हो गया। इतने पर भी खतरा टला नहीं है। पिछले गुरुवार को दिल्ली विमानतल पर लेह से आया स्पाइसजेट का विमान टैक्सी-वे की ओर जा रहा था तभी अकासा एयर कंपनी का विमान हैदराबाद उड़ान के लिए रनवे पर आ रहा था।

दोनों विमानों के पंखों की एक दूसरे से टक्कर हो गई। यदि एयरपोर्ट पर विमान सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है, तो यह टक्कर कैसे हुई? क्या एयर कंट्रोलर या पायलटों से चूक हुई? इस मामले को डीजीसीए जांच करेगा लेकिन जांच के नतीजे आम तौर पर जाहिर नहीं किए जाते।

हवाई यात्रा सुरक्षा को लेकर देश के 2 प्रमुख संगठन हैं-नागरी विमान परिवहन संचालनालय (डीजीसीए) तथा एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी), चड़ी विमान दुर्घटना होने पर एएआईबी व्यापक जांच करता है। वर्षों तक जांच चलती है और अधिकांश मामलों में पायलट या विमान परिवहन प्रणाली (एटीसी) को दोषी बताकर फाइल बंद कर दी जाती है।

विमान कंपनियों को अपना ब्रांड महत्वपूर्ण लगता है, इसलिए वह अपने विमान की तकनीकी खामी पर परदा डालकर जांच एजेंसी से मिलीभगत कर पायलट पर खप्पर फोड़ देती हैं। वास्तव में विमान की स्थिति कैसी है, क्या उसकी नियमित देखभाल होती है, उसके सिस्टम में कोई दोष तो नहीं है, इसकी जांच डीजीसीए को करनी चाहिए, देश में इस समय लगभग 550 विमान हैं।

एयरलाइंस को इनकी जांच व स्थिति की रिपोर्ट नियमित रूप से डीजीसीए को देनी चाहिए, यदि विमान के कलपुर्जे व प्रणाली सही स्थिति में हैं तो दुर्घटना क्यों होती है? फ्लाइट के पहले विमान की पूरी तरह जांच हो और फिटनेस प्रमाणपत्र के बाद ही उसे उड़ाया जाए, पिछले 10 वर्षों में देश में 75 नए हवाई अड्डों का निर्माण हुआ है।

यात्रियों को आकर्षित करने के लिए एयरलाइंस अनेक योजनाएं भी पेश करती हैं। विमान यात्रियों की तादाद बढ़ने से विमान को एक ही दिन में 3-3 चक्कर करने पड़ते हैं। इसे देखते हुए विमान बिल्कुल सही हालत में रहना चाहिए, ग्राउंड इंजीनियरिंग स्टाफ तथा मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। यह भी देखना चाहिए कि पायलट थका हुआ तो नहीं है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com