संतान के खुशहाल जीवन के लिए सकट चौथ का व्रत करने वाली महिलाएं अवश्य पढ़ें यह कथा, मिलेगा विघ्नहर्ता श्रीगणेश का आशीष!

सकट चतुर्थी का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है। जो दंपति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं उनके लिए सकट चौथ का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है। इस दिन पूजा के बाद व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए।
संतान के खुशहाल जीवन के लिए सकट चौथ का व्रत करने वाली महिलाएं अवश्य पढ़ें यह कथा, मिलेगा विघ्नहर्ता श्रीगणेश का आशीष!
भगवान गणेश,(सौ.सोशल मीडिया)
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Sakat Chauth Vrat Katha: संतान की सुख-समृद्धि व खुशहाली के लिए रखा जाने वाला सकट चौथ का व्रत गौरी पुत्र भगवान गणेश को समर्पित है। इस बार यह पर्व 17 जनवरी 2025 शुक्रवार को मनाया जाएगा। सकट चौथ का पर्व हिंदू महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान गणेश का पूजन करती है। सकट चतुर्थी का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है और कहते हैं कि इस व्रत को रखने से बच्चों के जीवन में आ रहे सभी संकट दूर होते हैं।

इसके अलावा, जो दंपति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं उनके लिए सकट चौथ का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है। इस दिन पूजा के बाद व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए। तभी व्रत संपूर्ण माना जाता है।

सकट चौथ व्रत कथा

सकट का व्रत भगवान गणेश की पूजा को समर्पित होता है। कहा जाता है कि यदि सच्चे भाव से सकट का उपवास रखा जाए तो संतान सुख की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है, लेकिन इस दिन सकट व्रत कथा का पाठ करना बेहद जरूरी होता है, इससे उपवास का संपूर्ण फल प्राप्त होता है, सकट के व्रत की कथा को लेकर कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव जी ने कार्तिकेय और गणेश जी से पूछा कि तुम दोनों में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। शिव जी की यह बात सुनकर दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए सक्षम समझा।

गणेश जी और कार्तिकेय के जवाब सुनकर महादेव ने कहा कि तुम दोनों में से जो भी पहले इस पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस लौटेगा, वहीं देवताओं की मदद करने जाएगा।

शिव जी के इस वचन को सुनकर कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। लेकिन इस दौरान भगवान गणेश विचारमग्न हो गए कि वे चूहे के ऊपर चढ़कर सारी पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे तो इसमें बहुत समय लग जाएगा।

इस समय गणेश जी को फिर एक उपाय सूझा। वह अपने स्थान से उठकर अपने माता-पिता की सात परिक्रमा करके वापस बैठ गए। वहीं पृथ्वी की पूरी परिक्रमा करके कार्तिकेय भी लौट आए और स्वयं को विजय बताने लगे, फिर जब भोलेनाथ ने गणेश जी से पृथ्वी की परिक्रमा न करने का कारण पूछा, तो गणेश जी ने अपने उत्तर मे कहा कि-'माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।

गणेश जी के जवाब सुनकर शिव जी ने गणेशजी को देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी... इतना ही नहीं शंकर जी ने कहा कि जो भी साधक चतुर्थी के दिन तुम्हारा श्रद्धा पूर्वक पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि व खुशहाली के लिए रखती हैं। वहीं, संतान प्राप्ति की कामना से भी इस व्रत को बहुत ही फलदायी माना गया हैं। कहते हैं कि सकट माता के आशीर्वाद से संतान सुख की मनोकामना पूरी होती हैं।

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