

सावन माह की दूसरी 'विनायक चतुर्थी' आज 8 अगस्त, गुरुवार को मनाई जा रही है। वैदिक पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है, लेकिन इस दिन को लेकर एक खास धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए।
विनायक चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा की पूजा करना और दर्शन करना भी वर्जित माना गया है। आइए जान लेते हैं कि ज्यातिषाचार्यों के अनुसार विनायक चतुर्थी व्रत में क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, शुभ योग और चंद्र दर्शन नहीं करने के पीछे के कारणों के बारे में .....
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 7 अगस्त को बुधवार की रात 10 बजकर 05 मिनट होगा। चतुर्थी तिथि की समाप्ति 8 अगस्त, गुरुवार रात 12 बजकर 36 मिनट पर होगी। उदयातिथि के अनुसार, 8 अगस्त को चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
इस विनायक चतुर्थी पर आज कई शुभ योग भी बन रहे हैं जिससे इस दिन व्रत-पूजन करने से विशेष लाभ मिलेगा। इस दिन शिव योग और रवि योग बन रहा है तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी का व्रत करने से साधकों के जीवन से भगवान गणेश सभी विघ्न बाधाएं हर लेते हैं और सुख-समृद्धि का आशीष देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी व्रत के दौरान भूलकर भी चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लगते हैं। कोई गलती न होने पर भी व्यक्ति को गलत आरोप झेलने पड़ते हैं। हालांकि ऐसी भी मान्यता है कि यदि इस दिन गलती से चंद्र दर्शन हो जाएं तो भगवान कृष्ण के नाम का जाप कर लेना चाहिए। कृष्ण कृष्ण जाप करने से दोष खत्म हो जाता है। श्रीमदभागवत की कथा के अनुसार चतुर्थी पर चांद देखने से ही भगवान श्रीकृष्ण पर भी झूठा कंलक लगा था जिससे मुक्ति के लिए उन्होंने गणेश जी की विधिवत पूजा की थी।
इस दिन चंद्र दर्शन न करने को लेकर पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार जब गणेश जी को गज मुख लगाया गया तो वे गजानन कहलाए। तब उन्होंने माता-पिता के रूप में पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा की जिस कारण से उनकी पूजा सबसे पहले की जाती है। कथा के अनुसार जब सभी देवता गणेश जी की स्तुति कर रहे थे तो इस दौरान चंद्र देव गणेश जी को देखकर मुस्कुरा रहे थे। यह देखकर गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा को अपने सौन्दर्य का घमंड है जिस कारण वे उनका उपहास कर रहे हैं।
इस बात से गणेश जी अत्यंत क्रोधित हुए और चंद्रमा को काले होने का शाप दे दिया। जब चंद्रमा को भूल का एहसास हुआ तब उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी। तब गणेश जी ने चंद्र देव से कहा कि सूर्य का प्रकाश पाकर तुम एक दिन पूर्ण हो जाओगे, लेकिन चतुर्थी का दिन तुम्हारी गलती के लिए मिले दण्ड के लिए हमेशा याद किया जाएगा। गणेश जी ने कहा कि इस दिन को याद करके कभी कोई भी अपने सौंदर्य पर अभिमान नहीं करेगा और जो कोई इस भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर तुम्हारे दर्शन करेगा, उसे झूठा आरोप झेलना पड़ेगा।