Kali Puja: कोलकाता में दिवाली पर किस देवी की पूजा होती है? जानें मां काली का महत्व

Kolkata Kali Puja: कोलकाता में दिवाली पर मां लक्ष्मी के बजाय मां काली की विशेष पूजा होती है। जानिए काली पूजा और श्यामा पूजा का धार्मिक महत्व, परंपराएं और इस पर्व से जुड़ी खास बातें।
Kolkata Diwali Celebration
दिवाली पर मां काली की पूजाफोटो.सोशल मीडिया
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Highlights:

  • कोलकाता में दिवाली पर मां काली की पूजा होती है।

  • मां काली की पूजा को काली पूजा और श्यामा पूजा कहते हैं।

  • मां काली को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।

  • पूजा में मां को फूल, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है।

  • दिवाली पर कोलकाता के मंदिरों और पंडालों को सजाया जाता है।

Kolkata Diwali Celebration: दिवाली का त्योहार पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन अधिकतर घरों में धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लेकिन, क्या आप जानते है कि, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दिवाली का नजारा कुछ अलग ही देखने को मिलता है।

यहां दीपावली की रात मां काली की विशेष पूजा की जाती है। इस पर्व को काली पूजा या श्यामा पूजा के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि कोलकाता में दिवाली पर मां काली की पूजा क्यों होती है और इसका क्या धार्मिक महत्व है।

कोलकाता में दिवाली पर किस देवी की होती है पूजा?

कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में दिवाली की अमावस्या पर मां काली की आराधना की जाती है। मां काली को शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस अवसर पर उनकी प्रतिमा स्थापित करते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। बंगाल में इस पूजा को श्यामा पूजा भी कहा जाता है।

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काली पूजा और दिवाली का क्या है संबंध?

हिंदू पंचांग के अनुसार, काली पूजा और दिवाली दोनों कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती हैं। जहां देश के कई हिस्सों में इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है, वहीं बंगाल में मां काली की आराधना प्रमुख रहती है। इस तरह एक ही पर्व को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।

मां काली की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां काली शक्ति और निर्भयता की देवी हैं। उनका स्वरूप बुराई और नकारात्मकता पर विजय का संदेश देता है। भक्त उनसे साहस, विवेक और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। मां काली की आराधना को शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

काली पूजा में किन चीजों का होता है विशेष महत्व?

काली पूजा के अवसर पर मां की प्रतिमा को फूलों और आभूषणों से सजाया जाता है। लाल गुड़हल के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा फल, मिठाई, दीपक और धूप से पूजा की जाती है। कई स्थानों पर रात के समय विशेष पूजा और आरती का आयोजन भी होता है।

कोलकाता में कैसे मनाई जाती है काली पूजा?

काली पूजा के दौरान कोलकाता के विभिन्न इलाकों में आकर्षक पंडाल सजाए जाते हैं। मंदिरों और घरों में भक्त मां काली की आराधना करते हैं। दीपों, रोशनी और सजावट से पूरा शहर उत्सव के रंग में नजर आता है। परिवार और मित्र मिलकर इस पर्व की खुशियां मनाते हैं।

इस तरह कोलकाता की दिवाली मां काली की भक्ति, शक्ति उपासना और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर संगम है।

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