कुंवारी कन्याओं को मासिक शिवरात्रि व्रत से मिलेगा मनचाहा वर, करें शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा, जानिए पूजा की विधि

मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत अगर कुंवारी कन्याएं रखती हैं, तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसलिए सनातन धर्म में इस व्रत का बड़ा महत्व है।
कुंवारी कन्याओं को मासिक शिवरात्रि व्रत से मिलेगा मनचाहा वर, करें शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा, जानिए पूजा की विधि
कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं व्रत जानिए,(सौ.सोशल मीडिया)
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Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है। इस बार माघ महीने की मासिक शिवरात्रि का व्रत 27 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। साथ ही, मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जाता है।

इस व्रत को विवाहित महिलाएं एवं कुंवारी कन्याएं जरुर करती हैं। मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत अगर कुंवारी कन्याएं रखती हैं, तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक शिवरात्रि पर कुवांरी कन्याओं के लिए व्रत की विधि क्या है-

कब मनाई जाएगी मासिक शिवरात्रि

पंचांग के अनुसार, माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 27 जनवरी को रात 8 बजकर 34 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 28 जनवरी को शाम 7 बजकर 35 मिनट पर हो जाएगा।

ऐसे में मासिक शिवरात्रि 27 जनवरी को मनाई जाएगी। 27 जनवरी को ही मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जाएगा।

क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं व्रत

ज्योतिषयों के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत पुरूष और महिलाएं दोनों ही रख सकते हैं। साथ ही, कुंवारी कन्याएं भी ये व्रत रख सकती हैं। आपको बता दें, मासिक शिवरात्रि व्रत महाशिवरात्रि के दिन से शुरू करना शुभ माना जाता है। इसलिए इसी दिन से मासिक शिवरात्रि व्रत शुरू करना चाहिए।

इस दिन रात को जागकर शिव जी का पूजन करना शुभ माना जाता हैं। कहा जाता है कि इस समय पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाए शीघ्र पूरी होती हैं।

कुंवारी कन्याएं ऐसे करें मासिक शिवरात्रि व्रत

ज्योतिष बताते हैं कि, मासिक शिवरात्रि वाले दिन कुंवारी कन्याओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लेना चाहिए। फिर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करनी चाहिए। जल, शुद्ध घी, दूध, शक्कर, शहद, दही आदि से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना चाहिए।

शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव की धूप, दीप, फल और फूल आदि से पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करना चाहिए।

शाम के समय फलाहार करना चाहिए। शिवरात्रि व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगले दिन भगवान शिव की पूजा के बाद दान आदि करके व्रत का पारण करना चाहिए।

मासिक शिवरात्रि का क्या है महत्व

शिवरात्रि के व्रत की महिमा से तो सभी भली-भांति परिचित हैं, लेकिन हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत भी बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि में व्रत, उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाता है और जातक की सारी समस्याएं दूर होती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वो कन्याएं जो मनोवांछित वर पाना चाहती हैं इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है और उनके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है, उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसलिए सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि व्रत का बड़ा महत्व है।

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