करवा चौथ के चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले नियम जान लीजिए,

हिन्दू धर्म में करवा चौथ का बड़ा महत्व हैं। इस व्रत में जितना महत्व करवा माता की पूजा का है, उतना ही चंद्रमा का भी हैं। ऐसे में चंद्र देव को अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का जरूर पालन करना चाहिए।
करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के नियम
करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के नियम (सो.सोशल मीडिया)
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Karwa Chauth 2024:  अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाने वाला करवा चौथ का पर्व इस बार 20 अक्टूबर,दिन रविवार को मनाई जा रही हैं। हिन्दू धर्म में करवा चौथ का बड़ा महत्व हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएं पति की उन्नति और लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। सारा दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत खोलती हैं।

आपको बता दें, इस व्रत में जितना महत्व करवा माता की पूजा का है, उतना ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण करने का भी हैं। इस व्रत में रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।

करवा चौथ की शुभता बढ़ाने के लिए और चंद्र देवता का आशीर्वाद पाने के लिए वास्तु शास्त्र में करवा चौथ के कुछ नियम बताए गए हैं। इन वास्तु नियमों का पालन करने से व्यक्ति को अखंड सौभाग्य मिलता है और खुशहाली बनी रहती है। तो ऐसे में आइए जानें इन वास्तु नियमों के बारे में-

ज्योतिष धर्म गुरु के मुताबिक, यदि आप करवा चौथ में छलनी से चांद के दर्शन करती हैं तो आपको हमेशा ऐसी छलनी चुननी चाहिए जो कहीं से टूटी-फूटी न हो। यदि संभव हो तो चांदी की छलनी का इस्तेमाल करें।

हालांकि सबके लिए ऐसा संभव नहीं होता है कि वो चांदी की छलनी ही चुने, लेकिन आपको प्लास्टिक की छलनी का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

चंद्रदेव की पूजा करते हुए आप पूर्व दिशा की ओर देखते हुए चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें। मान्यताओं के अनुसार, मंत्रों की ध्वनि से पॉजिटिव एनर्जी निकलती है जिससे वातावरण भी शांत बनता है।

कहते है, यदि आप करवा चौथ के दौरान चांद की पूजा करती हैं तो आपको ध्यान देना चाहिए कि आप पूजा के स्थान पर ही जल से भरा एक बर्तन रखें और इसी बर्तन में रखे जल से चांद को अर्घ्य दें।

पानी पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसी वजह से पूजा के समय जल का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है।

इसके अलावा, एक विशेष बात का ध्यान रहे कि, चंद्रमा की पूजा करने से पहले आप उस स्थान को अच्छी तरह से साफ़ करें।

किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए पूजा के स्थान को नमक के पानी से साफ़ करने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि आप जिस स्थान पर भी पूजा करने जा रहे हैं, वहां किसी भी तरह का कूड़ा -कचरा यानी गंदगी आदि न हो ।

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