

Shivling Par Itr Chadhane Ke Fayde : हिंदू धर्म में भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता माने जाते हैं, जो अपने भक्तों की थोड़ी-सी भक्ति और सच्ची श्रद्धा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। मान्यता है कि भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बड़े पूजा- पाठ करने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से चढ़ाया गया एक लोटा जल और एक बेलपत्र भी काफी है।
सावन के महीने में भक्त उन्हें खुश करने के लिए जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र और तरह-तरह के फल-फूल अर्पित करते हैं, लेकिन अक्सर एक चीज भूल जाते हैं, जो भगवान शिव को बेहद प्रिय है, वो है ‘इत्र’ खुशबू केवल सुगंध के लिए ही नहीं होती है, बल्कि अपने भक्ति और श्रद्धा का भी प्रतीक मानी जाती है।
शिवपुराण में भगवान शिव को श्रावण मास में उनका सबसे प्रिय इत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। उन्हें कृत्रिम इत्र की बजाय प्राकृतिक खुशबू वाले इत्र लगाना चाहिए।
महादेव को खस, केवड़ा, गुलाब और मोगरा का इत्र काफी प्रिय है। ये सभी इत्र भगवान शिव को ठंडक प्रदान करते हैं, जो प्राकृतिक के सबसे बड़े गुणों में शामिल है।
इत्र की भीनी खुशबू आसपास के वातावरण को पवित्र करती है और मन के विचार शुद्ध होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर इत्र चढ़ाने से जीवन में सकारात्मकता, आकर्षण और मान-सम्मान बढ़ता है।
ऐसा माना जाता है कि सही विधि से शिवलिंग के विशेष स्थानों पर इत्र या सुगंधित द्रव्य अर्पित करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और कष्ट दूर होते हैं।
यहां इत्र लगाने से आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
यह स्थान माता पार्वती और भगवान शिव के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
यहां इत्र या जलार्पण करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।