रामायण की रचना क्यों हुई? कौन था इसके पीछे असली प्रेरणा और किसने दिया महर्षि वाल्मीकि को दिव्य ज्ञान

Composition of the Ramayana: रामायण भारतीय संस्कृति का वह महाकाव्य है, जो केवल भगवान राम के जीवन की कथा नहीं कहता, बल्कि धर्म, करुणा, मर्यादा और आदर्शों का मार्ग भी दिखाता है।
Ramayana composed real inspiration behind it, and who imparted divine knowledge to Maharishi Valmiki
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Basis of the Ramayana: रामायण भारतीय संस्कृति का वह महाकाव्य है, जो केवल भगवान राम के जीवन की कथा नहीं कहता, बल्कि धर्म, करुणा, मर्यादा और आदर्शों का मार्ग भी दिखाता है। इसकी रचना महर्षि वाल्मीकि जी ने की थी और इसे वाल्मीकि रामायण के नाम से सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। हालांकि समय-समय पर कई विद्वानों और कवियों ने रामायण को अपने-अपने शब्दों में प्रस्तुत किया, लेकिन असली प्रश्न यह नहीं कि रामायण के कितने रूप हैं, बल्कि यह है कि रामायण की रचना का आधार क्या था और इसे लिखने की प्रेरणा कहां से मिली।

रामायण की रचना का मूल आधार क्या था?

भगवान राम के संपूर्ण चरित्र को दर्शाने वाले इस महाकाव्य की रचना महर्षि वाल्मीकि जी ने 24,000 श्लोकों में की। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक दिन वाल्मीकि जी नदी तट पर क्रौंच पक्षियों के जोड़े को देख रहे थे। तभी एक बहेलिए ने प्रेम में लीन नर पक्षी का वध कर दिया। अपने साथी की मृत्यु से व्यथित मादा पक्षी का विलाप सुनकर वाल्मीकि जी का हृदय करुणा से भर उठा और उनके मुख से स्वतः यह श्लोक निकला

"मा निषाद प्रतिष्ठां त्वंगमः शाश्वतीः समाः।यत्क्रौंचमिथुनादेकं वधीः काममोहितम्॥"

यही श्लोक संस्कृत का पहला श्लोक माना गया और इसी क्षण महर्षि वाल्मीकि आदिकवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

देवऋषि नारद और रामायण की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले रामकथा देवऋषि नारद ने महर्षि वाल्मीकि को सुनाई थी। माना जाता है कि संसार का सारा ज्ञान भगवान शिव से उत्पन्न हुआ। भगवान शिव ने माता पार्वती को रामकथा सुनाई, जिसे काकभुशुण्डि नामक कौए ने सुना। वहीं से यह कथा नारद जी तक पहुंची और अंततः नारद जी ने इसे वाल्मीकि जी को सुनाया। इस दिव्य कथा ने वाल्मीकि जी के जीवन को बदल दिया और उन्होंने रामायण की रचना का संकल्प लिया।

लव-कुश और रामायण का प्रथम गायन

वाल्मीकि जी के आश्रम में माता सीता अपने पुत्र लव और कुश के साथ निवास करती थीं। कहा जाता है कि वाल्मीकि जी को भविष्य की घटनाओं का भी ज्ञान था। उन्होंने लव-कुश को संस्कृत में लयबद्ध रूप से रामायण का गान सिखाया। बाद में इन्हीं लव-कुश ने अयोध्या में भगवान राम के सामने रामायण का मधुर गायन किया, जिसे सुनकर स्वयं राम भी भावुक हो उठे।

आस्था, करुणा और धर्म का शाश्वत ग्रंथ

रामायण की रचना केवल एक साहित्यिक घटना नहीं थी, बल्कि यह करुणा से जन्मी वह गाथा थी, जिसने युगों-युगों तक मानवता को जीवन जीने की दिशा दी। यही कारण है कि रामायण आज भी हर घर, हर मन और हर पीढ़ी में जीवित है।

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