Padmini Ekadashi Katha: अधिक मास की पद्मिनी एकादशी पूजा में ज़रूर करें इस कथा का पाठ, जानिए क्या है इसकी महिमा

Padmini Ekadashi Katha Path: अधिक मास की पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ पद्मिनी एकादशी कथा का पाठ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
Padmini Ekadashi Vrat Katha
भगवान विष्णु (सौ.AI)
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Padmini Ekadashi Vrat Katha: 27 मई को पद्मिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। तीन वर्षों में एक बार आने वाली यह दुर्लभ एकादशी सनातन धर्म में अत्यंत शुभ और महापुण्यदायिनी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला तथा समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। वहीं इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत कथा पढ़ना जरूरी होता है। वरना पूजा अधूरी मानी जाती है।

पद्मिनी एकादशी पर करें इस कथा का पाठ

कार्तवीर्य नामक एक महान राजा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में त्रेतायुग में कार्तवीर्य नामक एक महान राजा राज्य करते थे। वे बहुत पराक्रमी और धर्मात्मा थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी रानी पद्मिनी अत्यंत दुखी रहते थे। राजा ने अनेक यज्ञ, दान और पूजा-पाठ किए, लेकिन उन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हुई।

हजारों वर्षों तक भगवान विष्णु की आराधना

कथा के अनुसार, एक दिन राजा ने राज्य का भार मंत्रियों को सौंप दिया और अपनी पत्नी पद्मिनी के साथ वन में तपस्या करने चले गए। दोनों ने वर्षों तक कठोर तप किया। राजा कार्तवीर्य ने हजारों वर्षों तक भगवान विष्णु की आराधना की, लेकिन फिर भी उन्हें कोई वरदान प्राप्त नहीं हुआ। तपस्या के कारण राजा का शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया।

रानी पद्मिनी अनसूया माता के आश्रम पहुंचीं

रानी पद्मिनी अपने पति की ऐसी अवस्था देखकर चिंतित रहने लगीं। एक दिन वे वन में भ्रमण करते हुए महान पतिव्रता अनसूया माता के आश्रम पहुंचीं। रानी ने माता अनसूया को प्रणाम किया और विनम्रता से अपनी पीड़ा सुनाई। माता अनसूया का उपदेश रानी पद्मिनी की भक्ति और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर माता अनसूया ने कहा— “हे देवी! अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है।

रानी पद्मिनी ने पद्मिनी एकादशी व्रत किया

यदि आप इस व्रत को विधिपूर्वक करें और भगवान विष्णु की आराधना करें, तो निश्चित ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।” माता अनसूया ने रानी को व्रत की संपूर्ण विधि बताई। रानी पद्मिनी ने अत्यंत श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उन्होंने पूरी रात जागरण किया, भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन किए और द्वादशी तिथि में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दी। भगवान विष्णु का प्रकट होना रानी पद्मिनी की कठोर भक्ति और व्रत से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। वे गरुड़ पर सवार होकर प्रकट हुए और बोले— “हे देवी! मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं। वर मांगो।” रानी ने हाथ जोड़कर कहा-“प्रभु! मेरे पति को ऐसा तेजस्वी और बलवान पुत्र प्राप्त हो, जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध हो।” भगवान विष्णु ने “तथास्तु” कहा और अंतर्ध्यान हो गए।

पराक्रमी पुत्र को जन्म दिया

कुछ समय बाद रानी पद्मिनी ने एक अत्यंत पराक्रमी पुत्र को जन्म दिया। वही पुत्र आगे चलकर कार्तवीर्य अर्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कहा जाता है कि उसमें हजार भुजाओं का बल था और उसने अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की।

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