Mohini Ekadashi: आज मोहिनी एकादशी व्रत, जरूर पढ़ें ये चमत्कारी कथा, जीवन से दूर होंगे सारे कष्ट

Mohini Ekadashi Katha: आज मोहिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और कथा पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
Mohini Ekadashi Vrat Kab Hai
भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी( सौ.AI)
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Mohini Ekadashi Vrat Kab Hai: भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित मोहिनी एकादशी का व्रत आज रखा जा रहा है। हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली माना गया है। धर्म शास्त्रों में इस व्रत को करने से पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने और सुनने मात्र से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है।

मोहिनी एकादशी व्रत की कथा

  • धनपाल दयालु स्वभाव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नामक नगर स्थित था। यहां धनपाल नामक एक व्यक्ति रहता था, जो दयालु स्वभाव के साथ धनी भी था। धनपाल लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था. साथ ही काफी दान-पुण्य करता था। धनपाल के पांच बेटे थे, जिसमें से सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि घर के सभी सदस्यों से अलग था।

  • गलत संगत में फंस गया धृष्टबुद्धि

बताया जाता है कि, धनपाल का सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि बहुत ही कम उम्र में गलत संगत में फंस गया था, जिसके कारण उसे गलत चीजों की लत लग गई थी। धृष्टबुद्धि को पैसों की कदर नहीं थी। वो दिल खोलकर पैसे उड़ाता था। जब ये बात पिता धनपाल को पता चली तो उन्होंने धृष्टबुद्धि को कई बार समझाया, लेकिन धृष्टबुद्धि नहीं माना।

  • धृष्टबुद्धि ने घर में किया हंगामा

पिता धनपाल की बात को लेकर एक दिन जब धृष्टबुद्धि ने घर में बहुत हंगामा किया तो ने पिता धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया। घर से दूर धृष्टबुद्धि जब जंगल में रहने को मजबूर था तो उसे अपने कर्मों का पछतावा हुआ। एक दिन परेशान होकर धृष्टबुद्धि ऋषि कौंडिन्या के आश्रम में पहुंच गया। वहां ऋषि के चरणों में गिरकर धृष्टबुद्धि ने उन्हें पूरी बात बताई और कुछ उपाय बताने को कहा।

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  • धृष्टबुद्धि पर ऋषि को आ गई दया

ऋषि को धृष्टबुद्धि को देख दया आ गई, जिसके बाद उन्होंने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत रखने को कहा। उन्होंने धृष्टबुद्धि को बताया कि मोहिनी एकादशी का व्रत काफी प्रभावशाली है, जिसके सफल होने से सभी पाप नष्ट हो सकते हैं।

  • निश्चल मन से धृष्टबुद्धि ने रखा व्रत

ऋषि के मार्ग दर्शन से धृष्टबुद्धि ने सच्चे मन और पूरी विधि से मोहिनी एकादशी का व्रत रखा और कथा पाठ किया। जिसके बाद उसका जीवन धीरे-धीरे बदलने लगा और वो खुशी से अपने परिवार वालों के साथ रहने लगा। बताया जाता है कि इसी के बाद से देशभर में मोहिनी एकादशी का व्रत रखने की परंपरा शुरू हो गई, जो आज तक जारी है।

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