Mithuna Sankranti 2026: मिथुन संक्रांति का क्या है महत्व? जानिए क्या है सर्वार्थ सिद्धि योग की महिमा

Mithun Sankranti 2026 : मिथुन संक्रांति 2026 का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी माना
Mithun Sankranti Par Kya Karen
मिथुन संक्रांति ( सौ.जैमिनी)
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Mithun Sankranti Par Kya Karen: हर महीने सूर्य का राशि परिवर्तन होता है। जिस राशि में सूर्य का प्रवेश होता है उसे उस राशि का संक्रांति कहा जाता है। अभी सूर्य का संचरण शुक्र ग्रह की वृषभ राशि में हो रहा है। जल्द ही सूर्य का बुध की राशि मिथुन में प्रवेश होगा जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाएगा।

इस साल 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून को पड़ रही है। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण होगा, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।

कब होगा सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश?

पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 15 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी राशि परिवर्तन के साथ मिथुन संक्रांति का शुभ पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्म में सूर्य के गोचर को ऊर्जा, सफलता और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

मिथुन संक्रांति 2026 का पुण्यकाल

संक्रांति के दिन पुण्यकाल और महा पुण्यकाल का विशेष महत्व है। इस दौरान किए गए दान, जप और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

  • पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से शाम 7:20 बजे तक
  • महा पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से 3:19 बजे तक

मिथुन संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग

ज्योतिषयों के अनुसार, इस साल 2026 में मिथुन संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। बताया जा रहा है कि, यह शुभ योग सुबह 5:23 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और शुभ कर्मों के लिए लाभकारी माना गया है।

इस दिन सूर्य पूजा करना न भूलें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिथुन संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद जल में लाल चंदन, अक्षत, कुमकुम और लाल पुष्प मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। मान्यता है कि इससे करियर और कारोबार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही रुके हुए कार्यों में गति मिलती है।

दान पुण्य करें

मिथुन संक्रांति पर चावल, गेहूं, गुड़ जैसी वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। इसके अलावा छाता, सूती वस्त्र, चप्पल और पंखा दान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन इन चीजों का दान करने से किसी भी चीज की कमी नहीं होती।

सूर्य देव की होती है विशेष कृपा

सूर्य भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य मंत्रों का जप, आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य चालीसा का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे व्यक्ति को यश, सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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