महालक्ष्मी व्रत, आज इस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना, जानें 16 दिनों में कैसे पाएं मां लक्ष्मी की कृपा

Mahalakshmi Vrat 2026: आज से 16 दिनों का महालक्ष्मी व्रत शुरू रहा है। जानें 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत की पूजा विधि, नियम और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के खास उपाय।
Mahalakshmi Vrat Kalash Sthapana Muhurat
महालक्ष्मी व्रत(सौ.AI)
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Mahalakshmi Vrat Kalash Sthapana Muhurat : आज यानी 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। वहीं, आज से धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला 16 दिनों का महालक्ष्मी व्रत भी शुरू हो चुका है। यह व्रत हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है।

यह व्रत गणेश चतुर्थी के शुभ त्योहार के चार दिन बाद शुरू होता है और पितृ पक्ष के आठवें दिन तक चलता है। यह व्रत भारत के उत्तरी क्षेत्रों, जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में बहुत उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं महालक्ष्मी व्रत की सही तारीख, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा की सरल विधि।

कब से कब तक मनाया जाएगा महालक्ष्मी व्रत ?

इस वर्ष 2026 में महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर 2026 शनिवार से होकर 3 अक्टूबर 2026 शनिवार को समाप्त होगा।

महालक्ष्‍मी व्रत का कलश स्‍थापना शुभ मुहूर्त

मां लक्ष्मी को समर्पित महालक्ष्मी व्रत एक महत्वपूर्ण व्रत है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।

कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 8 मिनट तक

  • दूसरा शुभ मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 40 मिनट से लेकर 9 बजकर 11 मिनट तक

  • मध्याह्न शुभ मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक

  • इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 11 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक

महालक्ष्मी व्रत में कैसे करें पूजा?

  • सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

  • अब तांबे या किसी साफ कलश में शुद्ध जल भरें।

  • इसमें अक्षत और एक सिक्के डाल सकते हैं।

  • कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाएं और नारियल रखें।

  • कलश पर रोली और कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं।

  • इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

  • माता को फूल, अक्षत, कुमकुम, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।

  • सोलह श्रृंगार की सामग्री और 16 गांठों वाला डोरा भी माता को अर्पित करें।

  • इसके बाद मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।

  • पूजा के दौरान श्री सूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना शुभ माना जाता है।

  • अंत में माता को फल, मिठाई, खीर या पंचमेवा का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।

क्या है महालक्ष्मी व्रत की उद्यापन विधि?

इस वर्ष महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन 3 अक्टूबर को है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें। इसके बाद माता महालक्ष्मी की पूजा करें। श्री सूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करके माता से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल को आम के पत्ते की सहायता से पूरे घर में छिड़क सकते हैं। बचा हुआ जल किसी पवित्र पौधे या वृक्ष के पास डालें। कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में बांटें।

कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल: सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 10 बजकर 45 मिनट तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक

  • अत: कलश विसर्जन के साथ-साथ 16 गांठों वाले सूत या डोरे को माता के सामने रखकर पूजा करने के बाद नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाता है।

महालक्ष्मी व्रत में कैसे करें पूजा?

  • सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

  • अब तांबे या किसी साफ कलश में शुद्ध जल भरें।

  • इसमें अक्षत और एक सिक्के डाल सकते हैं।

  • कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाएं और नारियल रखें।

  • कलश पर रोली और कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं।

  • इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

  • माता को फूल, अक्षत, कुमकुम, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।

  • सोलह श्रृंगार की सामग्री और 16 गांठों वाला डोरा भी माता को अर्पित करें।

  • इसके बाद मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।

  • पूजा के दौरान श्री सूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना शुभ माना जाता है।

  • अंत में माता को फल, मिठाई, खीर या पंचमेवा का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।

क्या है महालक्ष्मी व्रत की उद्यापन विधि?

इस वर्ष महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन 3 अक्टूबर को है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें। इसके बाद माता महालक्ष्मी की पूजा करें। श्री सूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करके माता से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल को आम के पत्ते की सहायता से पूरे घर में छिड़क सकते हैं। बचा हुआ जल किसी पवित्र पौधे या वृक्ष के पास डालें। कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में बांटें।

कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल: सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 10 बजकर 45 मिनट तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक

अत: कलश विसर्जन के साथ-साथ 16 गांठों वाले सूत या डोरे को माता के सामने रखकर पूजा करने के बाद नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाता है।

Mahalakshmi Vrat Kalash Sthapana Muhurat
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