

करवा चौथ की परंपराएं अलग-अलग राज्यों में अलग होती हैं।
पंजाब और हरियाणा में सरगी का खास महत्व है।
उत्तर प्रदेश में करवा माता की पूजा और व्रत कथा प्रचलित है।
राजस्थान में पारंपरिक वेशभूषा और पूजा की झलक मिलती है।
करवा चौथ पर पूजा के तरीके परिवार और स्थानीय रीति के अनुसार बदल सकते हैं।
Karwa Chauth Celebration In India: करवा चौथ का त्योहार भारत में प्रेम, आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में लोकप्रिय है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और परिवारों में इसे मनाने के तरीके में कुछ अंतर देखने को मिलते हैं।
कहीं सरगी की खास परंपरा है, तो कहीं महिलाएं समूह में पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। करवा चौथ 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में यह त्योहार किस तरह मनाया जाता है।
पंजाब और हरियाणा में करवा चौथ की तैयारियां सुबह से ही शुरू हो जाती हैं। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और फेनियां जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। महिलाएं शाम को सज-धजकर एक साथ पूजा करती हैं। कई जगह पूजा की थालियां घुमाने और पारंपरिक गीत गाने की भी परंपरा है।
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में महिलाएं करवा चौथ पर करवा माता की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। कुछ परिवारों में दीवार पर गेरू या चावल के घोल से पूजा से जुड़ी आकृतियां बनाई जाती हैं। पूजा में करवा, दीपक, मिठाई और अन्य सामग्री का इस्तेमाल स्थानीय रीति के अनुसार किया जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी प्रचलित है।
राजस्थान में करवा चौथ के अवसर पर कई महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधान पहनती हैं। कुछ क्षेत्रों में चौथ माता की पूजा का विशेष महत्व है। परिवारों में पूजा की सामग्री, करवे की सजावट और कथा सुनने के तरीके में स्थानीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
मध्य प्रदेश के कई परिवारों में भी करवा चौथ श्रद्धा से मनाया जाता है। पूजा, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने जैसी परंपराएं प्रचलित हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में विभिन्न क्षेत्रों से आए परिवार अपनी-अपनी पारिवारिक रीति के अनुसार सामूहिक पूजा भी करते हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में यह उत्तर भारतीय समुदायों तथा कुछ अन्य परिवारों के बीच मनाया जाता है, लेकिन वहां इसकी परंपरा हर जगह समान नहीं है।
करवा चौथ मनाने का तरीका हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसा नहीं होता। सरगी, पूजा की थाली, व्रत कथा और चंद्र दर्शन जैसी रस्मों में स्थानीय रीति के अनुसार बदलाव हो सकते हैं। इसलिए किसी एक तरीके को सभी के लिए अनिवार्य मानना सही नहीं है। इस त्योहार का अवसर परिवार के साथ समय बिताने, अपनी परंपराओं को समझने और रिश्तों में स्नेह जताने का माध्यम भी बन सकता है।