कर्ज और कंगाली से छुटकारा पाने का बढ़िया मौका, कामदा एकादशी के दिन करें ये काम

Ekadashi Ke Totke: कामदा एकादशी का दिन कर्ज और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से व्रत, पूजा और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
Kamada Ekadashi Upay
भगवान विष्णु (सौ. Gemini)
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Kamada Ekadashi Upay: हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को 'कामदा एकादशी' कहा जाता है, जो इस बार कल रविवार 29 मार्च को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी के दिन तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, एकादशी के दिन तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

कामदा एकादशी 2026 तिथि और समय

पंचांग की गणना अनुसार, इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च को सुबह 08 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 29 मार्च को सुबह 07 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में 29 मार्च को कामदा एकादशी व्रत किया जाएगा।

एकादशी के दिन करें तुलसी माता की पूजा

  • एकादशी के दिन प्रातः काल में उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • अब पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • विधिवत रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें।
  • भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।
  • तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और 5, 7 या फिर 11 बार परिक्रमा करें।
  • तुलसी के मंत्रों का जप करें व तुलसी जी की आरती करें।

एकादशी तिथि पर भूल से भी न करें ये गलतियां

  • एकादशी तिथि पर स्नान करने के बाद ही तुलसी को स्पर्श करें।
  • एकादशी तिथि पर तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।
  • मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी एकादशी का व्रत रखती हैं और जल अर्पित करने से उनका व्रत खंडित हो सकता है।
  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भी नहीं उतारने चाहिए।
  • तुलसी को गंदे या फिर जूठे हाथों से न छूएं।
  • तुलसी के आस-पास जूते-चप्पल या कूड़ेदान न रखें।
  • एकादशी पर तुलसी की पूजा में काले कपड़े न पहनें।

तुलसी जी के मंत्र -

1. महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

2. तुलसी गायत्री - ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।

3. तुलसी नामाष्टक मंत्र -

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

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