जहीर ने 12वीं के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन उनके पिता ने क्रिकेट की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रीरामपुर से मुंबई आने के बाद जहीर ने तेज गेंदबाजी पर गंभीरता से काम किया और MRF पेस फाउंडेशन से जुड़े प्रशिक्षण ने उनके खेल को नई दिशा दी।सोर्स- सोशल मीडिया