आंखों में रोशनी नहीं थी, पर सुरों से रोशन कर दी दुनिया, रवींद्र जैन की पुण्यतिथि पर जानिए उनकी अनकही कहानी

Ravindra Jain Death Anniversary: 9 अक्टूबर को रविंद्र जैन की पुण्यतिथि पर जानें उनकी जिंदगी की प्रेरक बातें। जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने अपने संगीत से भारतीय सिनेमा में गहरी छाप छोड़ी।
Ravindra Jain Life Journey
रविंद्र जैनसोर्स- सोशल मीडिया
Updated on: 
Ravindra Jain was born in Aligarh
रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। वे जन्म से ही नेत्रहीन थे, लेकिन इस चुनौती ने उनके संगीत के प्रति प्रेम को कभी कमजोर नहीं होने दिया।सोर्स- सोशल मीडिया
Ravindra Jain showed an inclination towards music from childhood
बचपन से ही रविंद्र जैन का रुझान संगीत की ओर साफ नजर आने लगा था, और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक कुशल संगीतकार, गीतकार और गायक के रूप में निखारना शुरू कर दिया।सोर्स- सोशल मीडिया
Ravindra Jain career began in Mumbai
1972 के आसपास रविंद्र जैन अलीगढ़ से मुंबई आए और फिल्मी दुनिया में संगीत देना शुरू किया। उनका पहला गाना खुद मोहम्मद रफी ने गाया था, हालांकि वह गाना कभी रिलीज नहीं हो पाया।सोर्स- सोशल मीडिया
Ravindra Jain gained recognition with Chor Machaye Shor
1974 में आई फिल्म "चोर मचाए शोर" ने रविंद्र जैन को इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान दिलाई। इसी फिल्म के एक गाने की धुन बाद में "दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे" टाइटल सॉन्ग के लिए भी इस्तेमाल हुई।डिजाइन फोटो
Credited with bringing Yesudas to Bollywood
रविंद्र जैन ने ही दक्षिण भारतीय गायक के.जे. यसुदास को बॉलीवुड में पहचान दिलाई। 1976 की फिल्म "चितचोर" से शुरू हुई उनकी जोड़ी ने कई यादगार गीत दिए, और जैन उन्हें "भारत की आवाज" कहकर बुलाते थे।सोर्स- सोशल मीडिया
A special bond with the Rajshri banner
"चितचोर", "गीत गाता चल", "नदिया के पार" और "तपस्या" जैसी राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों में रविंद्र जैन के मधुर संगीत ने एक अलग ही पहचान बनाई, जो सीधी-सादी पर दिल को छूने वाली धुनों के लिए जानी गई।डिजाइन फोटो
A memorable duet with Raj Kapoor
1985 में आई राज कपूर की फिल्म "राम तेरी गंगा मैली" रविंद्र जैन के करियर का सबसे बड़ा मुकाम साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।डिजाइन फोटो
Left a deep mark on the small screen as well
फिल्मों के अलावा रविंद्र जैन ने रामानंद सागर की "रामायण" और "लव कुश" जैसे धारावाहिकों के लिए भी संगीत दिया, जो आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार संगीत में गिना जाता है।डिजाइन फोटो
Honoured with the Padma Shri
अपने चार दशकों से लंबे संगीत सफर और असाधारण योगदान के लिए 2015 में रविंद्र जैन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया।सोर्स- सोशल मीडिया
Passed away on October 9, 2015
लंबी बीमारी से जूझने के बाद 9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण रविंद्र जैन का निधन हो गया। लेकिन उनकी बनाई धुनें आज भी करोड़ों दिलों में उतनी ही ताजगी के साथ गूंजती हैं।सोर्स- सोशल मीडिया

संबंधित खबरें

No stories found.
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com