Ramayana Characters: राम से जटायु तक, रामायण के 10 किरदार; जिनकी कहानियाँ आज भी देती हैं सीख

Ramayana Characters Facts: रामायण के 10 प्रमुख पात्रों की दिलचस्प बातें जानिए, श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान, रावण, कुंभकर्ण, विभीषण, सुग्रीव और जटायु की कथा और खासियतें तस्वीरों में।
Ramayana main characters
रामायण के पात्रडिजाइन फोटो
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Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को "आदि काव्य" कहा जाता है। इसमें सात कांड और लगभग चौबीस हजार श्लोक माने जाते हैं। हर किरदार अपने आप में एक कथा है, और हर कथा से कोई सीख मिलती है। चलिए जानते हैं श्रीराम, सीता, हनुमान और रावण समेत 10 प्रमुख पात्रों की दिलचस्प बातें।डिजाइन फोटो
An image of Lord Rama holding a bow
अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र राम इक्ष्वाकु वंश के राजकुमार थे। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए उन्होंने चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। इसी त्याग और आदर्श आचरण के कारण उन्हें "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है। चैत्र शुक्ल नवमी को उनका जन्म दिवस रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।डिजाइन फोटो
A traditional depiction of Mother Sita
मिथिला के राजा जनक को हल चलाते समय धरती से सीता मिलीं, इसी कारण उनका नाम "सीता" पड़ा, जिसका अर्थ हल की रेखा भी है। उन्हें जानकी और मैथिली भी कहा जाता है। स्वयंवर में शिव का धनुष तोड़कर राम ने उनसे विवाह किया। वन में रावण द्वारा हरण के बाद भी उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। लव और कुश उनके ही पुत्र थे।डिजाइन फोटो
An image of Rama and Sita with Lakshmana
रानी सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण, शत्रुघ्न के जुड़वाँ भाई थे। जब राम वनवास के लिए निकले, तो लक्ष्मण भी बिना किसी माँग के उनके साथ हो लिए। लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि वे चौदह वर्ष जागते रहे ताकि राम और सीता की रक्षा कर सकें। प्रसिद्ध "लक्ष्मण रेखा" का वर्णन वाल्मीकि रामायण में नहीं, बल्कि बाद की रचनाओं और लोकप्रिय रूपांतरों में मिलता है।डिजाइन फोटो
Bharata carrying the charan-padukas
रानी कैकेयी के पुत्र भरत जब ननिहाल से लौटे और राम के वनवास की ख़बर मिली, तो वे दुखी हो उठे। उन्होंने राजगद्दी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वे वन जाकर राम को मनाने पहुँचे। राम के न लौटने पर भरत उनकी चरण-पादुकाएँ लेकर आए और उन्हें सिंहासन पर रखकर अयोध्या के पास नंदीग्राम में तपस्वी जैसा जीवन जीते हुए शासन चलाया। यह त्याग भ्रातृ-प्रेम का आदर्श माना जाता है।डिजाइन फोटो
Hanuman flying while carrying the Sanjeevani mountain
हनुमान को अंजना और केसरी का पुत्र तथा पवनदेव का अंश माना जाता है। रामायण में वे सुग्रीव के मंत्री और राम के परम भक्त बनकर आते हैं। उन्होंने समुद्र लाँघकर लंका पहुँचकर माता सीता का पता लगाया और रावण की लंका को अपनी पूँछ की आग से जलाया। लक्ष्मण के घायल होने पर वे संजीवनी बूटी वाला पर्वत उठा लाए। कई परंपराओं में उन्हें चिरंजीवी माना जाता है।डिजाइन फोटो
A grand depiction of the ten-headed Ravana
लंका का राजा रावण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा तथा कैकसी का पुत्र था। परंपरा में उसे चारों वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता, शिव का परम भक्त और वीणा-वादक बताया गया है। शिव तांडव स्तोत्र की रचना भी उसी से जोड़ी जाती है। पर अहंकार और सीता के हरण ने उसके पतन की नींव रखी। यही कारण है कि रामायण में वह प्रतिनायक होते हुए भी याद किया जाता है।डिजाइन फोटो
An image of the giant Kumbhakarna fast asleep
रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण को अपने विशाल शरीर और बल के लिए जाना जाता है। उत्तरकांड की कथा के अनुसार उसने ब्रह्मा से वरदान माँगते समय सरस्वती देवी के प्रभाव से "निर्देवत्व" की जगह "निद्रावत्व" माँग लिया और उसे बहुत लंबी नींद मिल गई। लोक-परंपरा में उसकी छह महीने की नींद प्रसिद्ध है। युद्ध में उसने भाई के पक्ष में लड़ते हुए वीरगति पाई।डिजाइन फोटो
An image of Vibhishana in the presence of Rama
रावण के छोटे भाई विभीषण ने बार-बार भाई को सीता लौटाने की सलाह दी। जब रावण ने उनकी बात नहीं मानी, तो वे लंका छोड़कर राम की शरण में पहुँचे। राम ने उन्हें अपनाया और युद्ध के बाद लंका का राजा बनाया। रावण की नाभि में अमृत वाली कथा और विभीषण द्वारा उसका रहस्य बताने का प्रसंग मूल वाल्मीकि रामायण में नहीं, बल्कि बाद की रामकथाओं में मिलता है।डिजाइन फोटो
A depiction of the friendship between Rama and Sugriva
किष्किंधा के वानर राजा सुग्रीव को अपने भाई बाली के कारण राज्य छोड़ना पड़ा था। राम से अग्नि को साक्षी मानकर उनकी मित्रता हुई। राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव फिर राजा बने। बदले में सुग्रीव ने सीता की खोज के लिए चारों दिशाओं में वानर-दल भेजे और राम की सेना का साथ दिया। यही मित्रता लंका-विजय की नींव बनी।डिजाइन फोटो
An image of the wounded Jatayu with Rama
गिद्धराज जटायु राजा दशरथ के मित्र थे। जब रावण सीता का हरण करके आकाश-मार्ग से जा रहा था, तो वृद्ध जटायु ने उसे रोकने की कोशिश की। रावण ने उनके पंख काट दिए। घायल जटायु ने राम को घटना बताई और प्राण त्याग दिए। राम ने उनका अंतिम संस्कार स्वयं किया। आज केरल के चडयमंगलम में उनकी विशाल मूर्ति इस बलिदान की याद दिलाती है।डिजाइन फोटो

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