राजेश कुमार ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी खुद को निराशा, चिंता या नकारात्मकता में डूबने नहीं दिया। उनके मुताबिक, खेती के उन पांच वर्षों ने उन्हें पहले से ज्यादा जमीन से जुड़ा और संवेदनशील इंसान बना दिया। उन्होंने महसूस किया कि जब किसी व्यक्ति के पास संसाधन नहीं होते, तब वह किस तरह के मानसिक और सामाजिक दबाव से गुजरता है।