द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद आजाद हिंद फौज के अधिकारियों पर लाल किले में मुकदमे चले, जिनके खिलाफ देशभर में जनता खड़ी हुई। नेताजी के निधन को आधिकारिक तौर पर 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुई विमान दुर्घटना से जोड़ा गया, पर इस पर आज भी बहस और अलग-अलग राय बनी हुई है। इसके बावजूद "जय हिंद" का उनका नारा और साहस आज भी हर भारतीय को प्रेरित करता है।सोर्स- सोशल मीडिया