जब दिलीप कुमार के एक तंज से आहत हुईं लता मंगेशकर, फिर उर्दू सीखने के लिए उठाया बड़ा कदम

Lata Mangeshkar Dilip Kumar Story: स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जन्मदिन पर जानिए उनसे जुड़ा एक खास किस्सा। एक्टर दिलीप कुमार के एक तंज से आहत होकर उन्होंने मौलाना से उर्दू भाषा सीखी थी।
Lata Mangeshkar Dilip Kumar Story
लता मंगेशकर(फाइल फोटो)
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भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी सुरीली आवाज से दशकों तक राज करने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर की गायकी का हर कोई मुरीद रहा है। हिंदी, मराठी और बंगाली समेत कई भाषाओं में हजारों गीत गाने वाली लता जी के गानों में शब्दों का साफ उच्चारण उनकी सबसे बड़ी खासियत थी।(फाइल फोटो)
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28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर का संगीत से नाता बचपन से ही जुड़ गया था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक कुशल संगीतकार थे, जिनसे लता जी ने संगीत की प्राथमिक बारीकियां सीखीं।(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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बात साल 1947 की है, जब मशहूर संगीतकार अनिल विश्वास ने लता मंगेशकर की पहचान दिलीप कुमार से कराई थी। उस दौर में दिलीप कुमार फिल्म इंडस्ट्री के बहुत बड़े सितारे बन चुके थे, जबकि लता जी अपने करियर के शुरुआती चरण में थीं।(फाइल फोटो)
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जब दिलीप साहब को पता चला कि लता जी महाराष्ट्रीयन बैकग्राउंड से आती हैं, तो उन्होंने उनके उर्दू उच्चारण पर एक हल्का सा तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि जिन्हें उर्दू की अच्छी समझ नहीं होती, उनके गीतों में मराठी प्रभाव आ जाता है और शब्दों के सही उच्चारण में झोल दिखता है।(फाइल फोटो)
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दिलीप कुमार की यह बात युवा लता मंगेशकर के मन को गहराई से चुभ गई। उन्होंने इस बात को नेगेटिव रूप से लेने के बजाय अपनी कमी को सुधारने का फैसला किया। घर लौटकर उन्होंने बिना समय गंवाए एक विद्वान मौलाना साहब को अपना उस्ताद बनाया और उनसे उर्दू भाषा की बारीकियां सीखनी शुरू कर दीं। (फाइल फोटो)
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सालों बाद लता मंगेशकर ने दिलीप कुमार की आत्मकथा 'द सब्सटेंस एंड द शैडो' में इस किस्से का जिक्र करते हुए इसे अपने जीवन का एक अनमोल तोहफा बताया। उनका मानना था कि अगर उस दिन दिलीप साहब ने उन्हें वह तंज नहीं कहते तो, तो शायद वह कभी अपने उच्चारण को इतना परफेक्ट बनाने पर ध्यान नहीं दे पातीं।(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)

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