लालू हमेशा ठेठ भोजपुरी, मगही, भाषा के मुहावरों में भाषण देकर वे तुरंत आम जनता और ग्रामीण मतदाताओं से सीधा और मजबूत जुड़ाव बना लेते थे। वे संसद हो या चुनावी मंच, अपनी मिमिक्री और अलग-अलग भाषाओं के मिश्रण से लोगों को खूब हंसाते। उनका यह अंदाज विरोधियों पर तंज कसने का एक बहुत ही चतुर और राजनीतिक हथियार होता था।