1914 में अमेरिका में उनकी गिरफ़्तारी हुई, पर जमानत पर छूटकर वे स्विट्ज़रलैंड चले गए। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे जर्मनी में सक्रिय भारतीय क्रांतिकारियों से जुड़े रहे। बाद में वे स्वीडन और इंग्लैंड में रहे, जहाँ उन्होंने बौद्ध दर्शन पर शोध किया और लंदन विश्वविद्यालय से पीएच.डी. हासिल की। उन्होंने "हिंट्स फ़ॉर सेल्फ़-कल्चर" जैसी पुस्तकें भी लिखीं।डिजाइन फोटो