
साल 1996 में आई यह फिल्म केवल एक भावुक ड्रामा नहीं थी, बल्कि यह फेमस फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन करियर का पहला कदम भी थी।
फिल्म खामोशी में जिस खूबसूरती से भावनाओं, गानों और सीन का मेल कराया गया, उसने हर किसी का ध्यान खींचा। एक मूक-बधिर जोड़े और उनकी सुन सकने वाली बेटी के बीच के रिश्ते को जिस सादगी और हमदर्दी के साथ दिखाया गया।
संजय लीला भंसाली की फिल्मों में संगीत कभी सिर्फ बैकग्राउंड में नहीं बजता, बल्कि वह कहानी का एक मुख्य किरदार बन जाता है। खामोशी इस सोच का सबसे पहला और बेहतरीन उदाहरण थी।
फिल्म खामेशी का हर एक गाना सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं था, बल्कि वह किरदारों के दिल की खामोशी और उनकी छिपी हुई भावनाओं को बयां करने का जरिया बना। यही वजह है कि 3 दशक बीत जाने के बाद भी इस फिल्म के नगमे लोगों के जेहन में तरोताजा हैं।
इसके अलावा, देवदास और बाजीराव मस्तानी जैसी बड़ी फिल्में बनाने से पहले ही उन्होंने अपनी इस पहली फिल्म में हर छोटे फ्रेम और रंग संयोजन पर खास ध्यान दिया था। कलाकारों से उम्दा और नेचुरल एक्टिंग निकलवाने की उनकी कला इसी फिल्म से दिखने लगी थी।
खामोशी से शुरू हुआ यह सिनेमाई सफर आगे चलकर हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, पद्मावत, गंगूबाई काठियावाड़ी और हीरामंडी जैसी ब्लॉकबस्टर कृतियों में तब्दील हुआ। भंसाली ने अपने करियर में 7 राष्ट्रीय पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और पद्म श्री जैसे नागरिक सम्मान हासिल किए।