शस्त्र पूजा, जिसे दक्षिण भारत में आयुध पूजा भी कहते हैं, नवरात्रि के अंतिम दिनों में, यानी नवमी या विजयादशमी पर की जाती है। इसमें शस्त्रों, औजारों और उपकरणों का तिलक, फूल और दीप से पूजन किया जाता है। यह परंपरा शक्ति, साहस और अच्छाई की रक्षा के भाव से जुड़ी है।फोटो सोर्स- AI