अकबर को आगरा के दरबार में दिवाली मनाने की परंपरा शुरू करने वाला माना जाता है, और उन्हीं से दिवाली पर घेवर, पेठा, खीर, पेड़ा, जलेबी और शाही टुकड़े जैसी मिठाइयाँ बाँटने की रीत जुड़ी बताई जाती है। आगरा किले और फ़तेहपुर सीकरी के महलों में दीप सजाए जाते थे। कुछ विवरणों में यह भी कहा गया है कि दरबार में रामायण का पाठ और कथा-मंचन होता था। अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति इसी रवैये में दिखती है।डिजाइन फोटो