अनीता ने कविता में लिखा, किसी किताब के रूप में नहीं, किसी poetry में नहीं, अपने भीतर कुछ रच रही हूं। कुछ अनदेखा सा, कुछ रच रही हूं, या कोई मुझे रच रहा है। उसके आने से, जन्म लूंगी मैं, मां के रूप में... अनीता ने इस कविता का श्रेय परितोष त्रिपाठी को दिया है।