लाडकी बहिन योजना में यवतमाल की 1.50 लाख महिलाएं अपात्र, ई-केवाईसी और दस्तावेजों की गड़बड़ी बनी वजह

Ladki Bahin Yojana: यवतमाल में लाडकी बहिन योजना के करीब 1.50 लाख लाभार्थी जांच के बाद अपात्र पाए गए हैं। तकनीकी खामियों से पात्र महिलाओं का लाभ बंद होने की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
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लाडकी बहिन योजना सोर्स- सोशल मीडिया
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Yavatmal Ladki Bahin Yojana e-KYC: मुख्यमंत्री मेरी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद यवतमाल जिले में अगस्त माह तक तकरीबन 1 लाख 50 हजार महिलाएं अपात्र होने की जानकारी है।

अपात्र घोषित महिलाओं में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से योजना का लाभ बंद होने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। ई-केवाईसी पूरी नहीं होना, वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कत, दस्तावेजों में विसंगति, निर्धारित आय सीमा से अधिक आय, परिवार में आयकरदाता सदस्य होना तथा चारपहिया वाहन जैसे विभिन्न कारणों से महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है।

महिलाओं का दावा

यवतमाल जिले में आर्थिक रूप से पात्र होने के बावजूद केवल तकनीकी कारणों से उन्हें योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया है। ऐसे में अपात्रता का स्पष्ट कारण बताकर पात्र महिलाओं को दोबारा अवसर देने की मांग की जा रही है।

यवतमाल जिले में मुख्यमंत्री मेरी लाडकी बहिन योजना के लिए करीब 7 लाख 19 हजार 880 महिलाओं ने आवेदन किया था। जांच के दौरान खेती, चारपहिया वाहन और अन्य पात्रता मानदंडों के आधार पर करीब डेढ़ लाख महिलाओं को विभिन्न कारणों से अपात्र पाया गया है।

ई-केवाईसी अथवा तकनीकी कारण

यवतमाल जिले में लाडकी बहिन योजना के ई-केवाईसी अथवा तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित महिलाओं को दोबारा मौका देने, अपात्रता की कारणवार जानकारी सार्वजनिक करने तथा वृद्ध, विधवा, परित्यक्ता, मेहनतकश और निराश्रित महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की जा रही है।

बड़ी संख्या में महिलाओं के अपात्र होने से जिले में असंतोष का माहौल है। इसके चलते यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण होने की संभावना है। हालांकि, अपात्र घोषित सभी महिलाएं वास्तव में पात्र हैं, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान

यवतमाल जिले में तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से लाभगंवाने वाली महिलाओं के मामलों की अलग से जांच करने की आवश्यकता है। गत विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू की गई इस योजना में अब कई तरह की खामियां सामने आ रही हैं।

जांच में करदाता और नौकरीपेशा महिलाओं के अलावा पात्रता मानदंडों पर खरी नहीं उतरने वाले लाभार्थियों के मामले भी सामने आए हैं। जिले में योजना की प्राथमिक छंटनी और दस्तावेज सत्यापन के दौरान पहले ही 27,317 आवेदन अपात्र पाए गए थे। इसके बाद विभिन्न कारणों और जांच के दौरान करीब 3,500 से 3,700 महिलाओं के नाम अथवा किस्तें दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण अपात्र की गई थीं।

पात्र महिलाएं बाहर न हों, ऐसा प्रयास दस्तावेजों और पात्रता मानदंडों में विसंगतियों के कारण करीब डेढ़ लाख महिलाओं का लाभ बंद हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी भी कई लाभार्थियों के मामलों की जांच और पूछताछ जारी है, तकनीकी कारणों से वास्तविक पात्र महिलाओं को योजना से बाहर न होना पड़े, इसके लिए उनकी शिकायतों का निराकरण करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। -

विशाल जाधव, जिला एवं महिला बाल विकास अधिकारी, यवतमाल

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