

Mumbai University Affiliation: मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) से संबद्ध 30 लॉ कॉलेजों की एफिलिएशन (संलग्नता) रद्द किए जाने के फैसले पर राजनीतिक और शैक्षणिक विवाद गहरा गया है। इस निर्णय के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। राकांपा (एसपी) ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए राज्य सरकार से तत्काल फैसला वापस लेने की मांग की है।
राकांपा (एसपी) के प्रदेश प्रवक्ता एवं यूथ मुंबई अध्यक्ष अमोल मातेले ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो राज्यभर में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि हजारों छात्र कानून की पढ़ाई के लिए प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं और ऐसे समय में कॉलेजों की मान्यता समाप्त करना उनके भविष्य को अनिश्चितता में डालने जैसा है।
अमोल मातेले ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों, किसान, मजदूर, ओबीसी, एससी, एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हजारों छात्र कठिन परिस्थितियों में उच्च शिक्षा का सपना देखते हैं। कई अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेते हैं, गहने गिरवी रखते हैं और वर्षों की जमा-पूंजी खर्च करते हैं। ऐसे में कॉलेजों की एफिलिएशन रद्द होने से इन परिवारों की उम्मीदों को गहरा झटका लगेगा।
इस मुद्दे पर राकांपा (एसपी) ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रवींद्र कुलकर्णी को पत्र भेजकर निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कॉलेजों की संलग्नता रद्द करने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए।
कॉलेजों की एफिलिएशन रद्द होने की खबर के बाद प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में असमंजस का माहौल है। शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि ऐसे फैसलों का सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ता है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और मुंबई विश्वविद्यालय के अगले कदम पर टिकी हुई है।