Thane में NDRF और SDRF का मेगा ड्रिल, आपदा से निपटने के लिए दो हफ्ते की विशेष ट्रेनिंग शुरू

NDRF SDRF Drill: महाराष्ट्र के ठाणे में प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए NDRF और SDRF ने 15 दिवसीय विशेष अभ्यास शुरू किया है, जिसमें 200 से अधिक कर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
Thane Disaster Management ​​NDRF SDRF Training Exercise April 2026
ठाणे में आपदा प्रबंधन की बारीकियां सीखते स्थानीय स्वयंसेवक और अधिकारी (सोर्स: AI)
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Thane Disaster Management Drill: महाराष्ट्र का ठाणे जिला अब किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए खुद को और अधिक सक्षम बना रहा है। जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आपदा मोचन बलों (NDRF और SDRF) के सहयोग से एक व्यापक 'आपदा तैयारी अभ्यास' की शुरुआत की है। शनिवार को आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा।

समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर

1 अप्रैल से शुरू हुआ यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 अप्रैल तक जारी रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़ या भूकंप) और मानव निर्मित दुर्घटनाओं के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और प्रतिक्रिया समय (Response Time) को कम करना है। अक्सर देखा जाता है कि आपदा के शुरुआती घंटों में तालमेल की कमी के कारण बचाव कार्य प्रभावित होता है, इसी कमी को दूर करने के लिए यह मेगा ड्रिल आयोजित की जा रही है।

कौन दे रहा है ट्रेनिंग और किसे मिल रही है?

विज्ञप्ति के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल 25 प्रशिक्षित विशेषज्ञ कर्मियों को विशेष रूप से ठाणे जिले में तैनात किया गया है। ये टीमें जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर रही हैं। प्रशिक्षण पाने वालों में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयंसेवक भी शामिल हैं। उपमंडल अधिकारियों और तहसीलदारों सहित अन्य अधिकारी, नागरिक सुरक्षा कर्मी, पुलिस पाटिल और 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसे सामुदायिक स्वयंसेवक प्रशिक्षण सत्रों में भाग ले रहे हैं।

इन इलाकों में चल रहा है अभियान

इस अभियान का दायरा काफी विस्तृत है। नवी मुंबई, ठाणे शहर, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर, मीरा-भायंदर, और भिवंडी-निजामपुर जैसे बड़े नगर निगमों के साथ-साथ शाहपुर, मुरबाड और अंबरनाथ जैसे तहसील कार्यालयों में भी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 200 प्रतिभागी अत्याधुनिक आपदा-प्रतिक्रिया उपकरणों के उपयोग और बचाव तकनीकों का कौशल सीख रहे हैं। इस पहल से न केवल प्रशासन की तैयारी पुख्ता होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर मौजूद 'आपदा मित्रों' के माध्यम से आम जनता तक भी सुरक्षा का संदेश पहुंचेगा।

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