

Narendra Mehta Dispute Kasarvadavali Police Station: महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति के दो प्रमुख घटक दलों, भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच जारी तनाव अब थाने की सड़कों और पुलिस स्टेशनों तक पहुँच गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और भाजपा नेता नरेंद्र मेहता के बीच का विवाद अब व्यक्तिगत आरोपों और जमीन हड़पने के दावों में तब्दील हो गया है। मुंबई मेट्रो के उद्घाटन समारोह में हुई धक्का-मुक्की के बाद अब मेहता ने सरनाईक पर भायंदरपाड़ा के एक परिवार की जमीन पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
सोमवार को नरेंद्र मेहता अपने समर्थकों, पार्षदों और महापौर के साथ कासरवडवली पुलिस स्टेशन पहुँचे। उन्होंने दावा किया कि कासरवडवली क्षेत्र के भोइर परिवार की कुल 2,439 वर्ग मीटर जमीन में से लगभग 1,219 वर्ग मीटर हिस्से पर प्रताप सरनाईक और उनके समर्थकों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। मेहता ने मौके का मुआयना करने के बाद पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाषाई मर्यादाओं को भी लांघ गया है। नरेंद्र मेहता के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर प्रताप सरनाईक को अपना "ड्राइवर" कहा था, सरनाईक के बेटे पुरवेश सरनाईक ने कड़ी आपत्ति जताई है। पुरवेश ने मेहता को एक खुला पत्र लिखकर उनके बयान को "घटिया और ओछा" करार दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद स्वीकार्य हैं, लेकिन शिष्टता और मर्यादा का पालन अनिवार्य है।
एक ओर जहाँ अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते और रिक्शा यूनियनें मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर सरनाईक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी ओर मीरा-भायंदर में आंतरिक राजनीतिक कलह चरम पर है। इससे पहले प्रताप सरनाईक ने भी मेहता के खिलाफ जनता दरबार में मिली शिकायतों के आधार पर जांच दल गठित करने की बात कही थी।
अब जबकि नरेंद्र मेहता ने सीधे पुलिस स्टेशन का रुख किया है, मीरा-भायंदर का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। शहर के नागरिक और राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि मंत्री प्रताप सरनाईक इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देते हैं और क्या राज्य सरकार इस 'कथित' भूमि कब्जे की निष्पक्ष जांच कराएगी।