मुंब्रा ट्रेन हादसा: अभियंताओं ने कहा- हमारी गलती नहीं, भीड़ की वजह से हुआ था एक्सीडेंट

Mumbra Train Accident: मुंब्रा ट्रेन हादसे में गैर-इरादतन हत्या के आरोप झेल रहे दो रेलवे अभियंताओं ने अदालत में कहा कि दुर्घटना उनकी लापरवाही से नहीं, बल्कि ट्रेन में अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण हुई।
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मुंब्रा ट्रेन हादसा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Thane Mumbra Train Accident Case: मुंब्रा ट्रेन दुर्घटना के सिलसिले में गैर-इरादतन हत्या के आरोप में नामजद दो रेलवे अभियंताओं ने मुंबई की एक अदालत में अपनी गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका दायर की है।

इन अभियंताओं ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया है कि यह दुखद घटना उनकी ओर से किसी भी तरह की लापरवाही या चूक के कारण नहीं हुई, बल्कि ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण हुई थी।

हादसे के विवरण और आरोप

यह दुर्घटना 9 जून को ठाणे जिले में दीवा और मुंब्रा रेलवे स्टेशनों के बीच हुई थी। घटना तब हुई जब कसारा और मुंबई में सीएसएमटी (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) की ओर जाने वाली दो ट्रेनें मुंब्रा स्टेशन के पास एक मोड़ पर एक-दूसरे को पार कर रही थीं।

इस दौरान, डिब्बों के फुटबोर्ड पर यात्रा कर रहे यात्रियों के पीठ पर लदे बैग आपस में टकरा गए, जिससे यात्री पटरी पर गिर गए और पांच लोगों की मौत हो गई।

सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने इस मामले में 1 नवंबर को सहायक मंडल अभियंता विशाल डोलस, वरिष्ठ विभागीय अभियंता समर यादव और रेलवे पटरियों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे अन्य अधिकारियों पर मामला दर्ज किया था। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 125(ए)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इंजीनियरों का बचाव

डोलस और यादव की ओर से पेश हुए वकील बलदेव राजपूत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. टी. पवार के समक्ष यह तर्क दिया कि यदि यह दुर्घटना रेलवे की विफलता के कारण हुई होती, तो यही त्रासदी अन्य ट्रेनों के साथ भी घटित होनी चाहिए थी, क्योंकि उसी स्थान से प्रतिदिन 200 ट्रेनें गुजरती हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि आवेदक सरकारी कर्मचारी हैं और पूछताछ के लिए किसी भी समय उपलब्ध हैं।

वकील ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का हवाला देते हुए भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि एनएचआरसी ने एक सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी द्वारा दिए गए इस तर्क को स्वीकार किया है कि इस तरह के हादसे उपनगरीय ट्रेनों में भीड़भाड़ का परिणाम होते हैं।

अदालत ने पुलिस को उनकी याचिका पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई 11 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

गौरतलब है कि दो अभियंताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के विरोध में कर्मचारी संघों ने अचानक हड़ताल कर दी थी, जिसके चलते केंद्रीय रेलवे की उपनगरीय ट्रेन सेवाएं बाधित हो गई थीं। इस हड़ताल के दौरान, बृहस्पतिवार शाम को सैंडहर्स्ट मार्ग रेलवे स्टेशन के पास एक उपनगरीय ट्रेन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए थे।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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