अब बारिश में भी नहीं रुकेगी मुंबई लोकल! जलभराव से निपटने भायखला-ठाणे में बनेगी अंडरग्राउंड टनल

Railway Drainage System: सेंट्रल रेलवे ने भायखला और ठाणे स्टेशन पर जलभराव रोकने के लिए माइक्रो-टनलिंग ड्रेनेज सिस्टम शुरू किया है। इससे पानी का बहाव सुचारू रहेगा और लोकल ट्रेन सेवाएं बाधित नहीं होंगी।
Central Railway Micro Tunneling Project
ठाणे स्टेशन पर माइक्रोटनलिंग का काम जारी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Central Railway Micro Tunneling Project: मुंबई की उपनगरीय रेलवे सेवाओं के लिए हर मानसून एक बड़ी चुनौती लेकर आता है, लेकिन इस बार सेंट्रल रेलवे ने भायखला और ठाणे जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। रेलवे ट्रैक के नीचे माइक्रो-टनलिंग तकनीक से ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित न हो और लोकल ट्रेन सेवाएं बिना रुके शुरू रहे।

भायखला स्टेशन क्षेत्र में हर साल ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों की रफ्तार थम जाती थी, इसे देखते हुए रेलवे ने ट्रैक लेवल बढ़ाने के साथ-साथ ट्रैक के नीचे छोटे-छोटे ड्रेनेज टनल बनाने का फैसला किया है। ये माइक्रो टनल मुख्य नालों से जुड़े होंगे, जिससे बारिश का पानी सीधे बाहर निकल सकेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत भायखला क्षेत्र में 35 से 40 माइक्रो टनल बनाए जाएंगे।

पिछले वर्ष लोकल सेवाएं हुई थी बुरी तरह प्रभावित

इससे पहले इसी तकनीक का इस्तेमाल दिवा कलवा, विक्रोली-कांजुरमार्ग और सायन-कुर्ला सेक्शन में किया गया था, जहां जलभराव के बावजूद लोकल ट्रेन संचालन को काफी हद तक सुचारू रखा गया। पिछले साल मानसून की शुरुआती बारिश में दादर, सायन, कुर्ला, मस्जिद और सैंडहर्स्ट रोड के बीच ट्रैक डूबने से सेंट्रल रेलवे की लोकल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उसी अनुभव के आधार पर अब भायखला को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, ठाणे स्टेशन पर भी मानसून से पहले माइक्रो-टनलिंग का काम तेजी से चल रहा है।

मध्य रेलवे के CPRO डॉ. स्वप्निल नीला ने बताया कि माइक्रो-टनलिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बारिश के पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित न हो। इससे ट्रैक के दोनों ओर पानी आसानी से निकलेगा और जलभराव की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी।

ट्रेंचलेस तकनीक का इस्तेमाल

यहां ट्रेंचलेस तकनीक के जरिए एमबीटीएम (माइक्रो टनल बोरिंग मशीन) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भीड़भाड़ वाले शहरी इलाके में सतह पर न्यूनतम असर पड़े। इस परियोजना में 2×110 मीटर लंबी पाइपलाइन, 1.0 मीटर व्यास के साथ बिछाई जा रही है। इन टनलों को ट्रैक से 2 से 3 मीटर नीचे बनाया जा रहा है, ताकि पानी दोनों ओर आसानी से बह सके। इससे ट्रैक पर पानी रुकने की घटनाएं काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

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