Maharashtra: ‘राज्य में युति है तो मीरा-भाईंदर में क्यों नहीं?’ सरनाईक का भाजपा से सवाल

Maharashtra Local Body Election: मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव से पहले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को महायुति पर 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर सियासी हलचल तेज कर दी है।
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प्रताप सरनाईक (सौ. X )
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Mira Bhayandar News In Hindi: मनपा चुनाव की रणभेरी बजने के बाद से ही सियासी शतरंज पर चालें तेज हो गई हैं। भाजपा-शिवसेना के बीच संभावित महायुति को लेकर चल रही खींचतान के बीच महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।

रविवार को पत्रकार परिषद में सरनाईक ने दो टूक कहा-" जब राज्य में महायुति है, तो मीरा-भाईंदर में क्यों नहीं? उन्होंने स्पष्ट किया कि ठाणे की तर्ज पर मीरा-भाईंदर में भी गठबंधन का फॉर्मूला तय होना चाहिए, ठाणे में शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में है, फिर भी शिवसेना ने कई अपनी सीटें भाजपा को दी है तो मीरा-भाईंदर में भाजपा बड़े भाई की भूमिका निभाए, यही संतुलन का फार्मूला है।

भाजपा के हमलों का सरनाईक ने दिया सटीक जवाब

सरनाईक ने खुलासा किया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा गठित समन्वय समिति के तहत हुई बैठक में उन्होंने युति का प्रस्ताव रखा था। शिवसेना ने 2017 के मनपा चुनाव में जीती 22 सीटों और प्रत्येक प्रभाग के पैनल में एक सीट की मांग की, जबकि भाजपा केवल 13 सीट देने पर अड़ी हुई है।

टाउन पार्क (शिवार गार्डन) के मुद्दे पर भाजपा के हमलों का जवाब देते हुए सरनाईक ने इतिहास के पन्ने पलट दिए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2004 में इसी टाउन पार्क को लेकर पारित प्रस्तावों में सूचक तत्कालीन नगरसेवक मोहन पाटिल और अनुमोदक की भूमिका खुद नरेंद्र मेहता की रही है।

इसी तरह 18 मई 2006 के एक अन्य प्रस्ताव में सूचक हेरल चोर्जिस और अनुमोदक परशुराम पाटिल थे। वर्तमान में हेरल बेर्जिस मेहता के साथ ही है। उन्होंने कहा कि युति की बातचीत ऐसे मुद्दों पर नहीं होती। ऐसी शर्त युति में बाधक होती है। कार्यकर्ताओं की अदला-बदली पर भी सरनाईक ने स्पष्ट कहा कि मेहता हमारे चार नगरसेवक लौटाएं, हम भी उनके पदाधिकारी लौटा देगे।

आंकड़ों से दिखाया शिवसेना को मजबूत

  • वोट बैंक को लेकर मेहता के दावे को खारिज करते हुए सरनाईक ने आंकड़ों के पन्ने भी खोले, उन्होंने बताया कि 2017 में मतदाताओं की संख्या 5,93, 336 थी, जो अब बढ़कर 8,19,153 हो गई है। 2017 में भाजपा के 61 नगरसेवक होने के बावजूद 2019 में मेहता निर्दलीय उम्मीदवार से हार गए थे, जबकि सरनाईक की बड़ी जीत हुई थी, जो इस बात का संकेत है कि शिवसेना का भी जनाधार मजबूत हुआ है। अंत में सरनाईक ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि नामांकन में अब सिर्फ दो दिन बचे है।
  • उन्हें भी शिवसेना से चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को जवाब देना है। अगर भाजपा स्वबल पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो शिवसेना भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। युति को लेकर विधायक नरेंद्र मेहता अपना रुख 24 घंटे में स्पष्ट करें, अब सबकी नजरें अगले 24 घंटों पर टिकी है। महायुति बनेगी या मीरा-भाईदर में भाजपा शिवसेना के बीच भी सीचा सियासी महासंग्राम होगा?
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