

Mira Bhayandar Municipal Corporation: मीरा भाईंदर मनपा के 31 स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब 4 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक हजारों विद्यार्थियों को पानी की बोतलें नहीं मिल पाई हैं।
गणवेश, नोटबुक और शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति में देरी के बाद अब विद्यार्थियों की रोजमर्रा की जरूरत वाली पानी की बोतलों की आपूर्ति भी सवालों के घेरे में है। मनपा स्कूलों में करीब 9 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की है।
मनपा की ओर से हर वर्ष विद्यार्थियों को मुफ्त गणवेश, जूते, शैक्षणिक सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बताया जा रहा है कि पानी की बोतलों की आपूर्ति का ठेका अप्रैल में ही निजी कंपनी को दिया गया था।
करीब 210 रुपये प्रति बोतल की दर तय होने की बात सामने आई है, बावजूद इसके सितंबर के अंत तक कई विद्यार्थियों को बोतलें नहीं मिली हैं।
एड. कृष्णा गुप्ता के अनुसार, टेंडर स्पेसिफिकेशन में पानी की बोतल के लिए स्टील के ढक्कन की अनिवार्यता थी। आरोप है कि मीरा भाईंदर मनपा द्वारा नियुक्त ठेकेदार नवकार यूनिफॉर्म्स ने इसके बजाय प्लास्टिक के ढक्कन वाली बोतलों के सैपल जमा किए हैं। इससे टेंडर की शर्तों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पानी की बोतलों के अलावा मीरा भाईंदर मनपा की ओर से वितरित जूतों को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। अभिभावकों का आरोप है कि लड़कियों को उनकी जरूरत के अनुरूप अलग डिजाइन के जूते देने के बजाय लड़कों के जूते दिए गए।
कई विद्यार्थियों को जूतों के साथ आवश्यक मोजे भी नहीं मिलने की शिकायत है। अभिभावकों ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ टेंडर प्रक्रिया, सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित कीमत, वास्तविक आपूर्ति और ठेकेदार को किए गए भुगतान की जांच की मांग की है। साथ ही, वर्षों से एक ही कंपनी को ठेका दिए जाने की चर्चाओं की भी जांच की मांग उठ रही है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल शुरू होने से पहले ही विद्यार्थियों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो जानी चाहिए थी। बोतलें नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों को स्कूल के पानी के नलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, विशेषकर मध्यावकाश के दौरान नलों पर भीड़ की स्थिति बन रही है।