11 यात्रियों की मौत के बाद भी नहीं लिया सबक, कल्याण में 5 सीटर टैक्सी में ठूंसे जा रहे हैं 10-11 पैसेंजर

Kalyan Murbad Road Accident: 11 मौतों के बाद भी कल्याण-मुरबाद रोड पर ओवरलोडिंग जारी। 5 सीटर टैक्सी में 11 यात्री। परिवहन मंत्री की सुरक्षित यात्रा की अपील।
Overcrowded Taxis Kalyan Acccident
Overcrowded Taxis Kalyan Acccident (डिजाइन फोटो)
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Overcrowded Taxis Kalyan: ठाणे जिले के कल्याण-मुरबाद मार्ग पर हुए उस भयावह हादसे की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई हैं, जिसमें 11 यात्रियों की जान चली गई। टिटवाला पुलिस ने इस मामले में इको टैक्सी और सीमेंट मिक्सर ट्रक चालक के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सड़क पर मौत का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के शोक व्यक्त करने के महज 24 घंटे के भीतर, उसी सड़क पर नियमों की धज्जियाँ उड़ती देखी गईं।

हैरानी की बात यह है कि जिस 'इको' वाहन की आधिकारिक क्षमता केवल 5+1 (ड्राइवर समेत 6) है, उसमें आज भी 10 से 11 यात्री जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।

हादसे से नहीं लिया कोई सबक

रायते पुल पर हुई टक्कर के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा, लेकिन कल्याण स्टेशन से लेकर मुरबाद, मलंगगढ़ रोड और भिवंडी तक अवैध यातायात सुचारू रूप से जारी है। काली-पीली टैक्सियों में यात्रियों को इस कदर ठूंसा जा रहा है कि चालक के पास वाहन नियंत्रित करने की जगह भी नहीं बचती। यात्रियों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी के कारण ही आए दिन मासूमों की बलि चढ़ रही है।

महंगाई का तर्क और पुलिस पर सवाल

जब इस ओवरलोडिंग के बारे में टैक्सी चालकों से बात की गई, तो उन्होंने अपनी मजबूरी का रोना रोया। चालकों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, सीएनजी की ऊंची कीमतों और भारी रखरखाव लागत के कारण कम यात्रियों के साथ धंधा करना नामुमकिन है। हालांकि, उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए पूछा, "अगर हम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, तो ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती? उनका नियंत्रण कहाँ है?"

परिवहन मंत्री की जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार की अपील

हादसे की गंभीरता को देखते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा कि "क्षमता से अधिक यात्री ले जाना न केवल अवैध है, बल्कि जानलेवा भी है। विभाग कार्रवाई कर रहा है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे वाहनों में बैठने से बचना चाहिए।" सवाल यह है कि क्या केवल अपीलों से यह जानलेवा सिलसिला थमेगा या प्रशासन को किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार है?

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