Bhiwandi Municipal Corporation स्थाई समिति चुनाव, सत्ता की कुर्सी के लिए सियासी जोड़तोड़ तेज

Bhiwandi Municipal Corporation की स्थाई समिति के 16 सदस्यों के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बहुमत के आंकड़े को लेकर कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के बीच जोड़तोड़ जारी है।
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Bhiwandi Municipal Corporation (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhiwandi Municipal Standing Committee Election: भिवंडी मनपा की स्थाई समिति के 16 सदस्यों के चुनाव 15 अप्रैल को महासभा सभागृह में होने जा रहे हैं। इस चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं और शहर में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

नगरसेवकों की संख्या के आधार पर देखें तो कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 30 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के 22, शिवसेना के 12, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 12 और समाजवादी पार्टी के 6 नगरसेवक हैं। इसके अलावा कोणार्क विकास आघाड़ी के 4, भिवंडी विकास मंच के 3 और 1 अपक्ष नगरसेवक भी शामिल हैं।

Bhiwandi Municipal में 16 सदस्यों का होगा चयन

संख्याबल के हिसाब से स्थाई समिति में कांग्रेस के 5, भाजपा के 4, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2, शिवसेना के 2, समाजवादी पार्टी के 1, कोणार्क विकास आघाड़ी के 1 और भिवंडी विकास मंच के 1 सदस्य चुने जाने की संभावना है।

चेयरमैन पद के लिए बहुमत जरूरी

स्थाई समिति के चेयरमैन पद पर कब्जा करने के लिए कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में सभी दल बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए जोड़तोड़ में लगे हुए हैं।

सेक्युलर फ्रंट की भूमिका अहम

सेक्युलर फ्रंट के 7 सदस्यों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन चेयरमैन पद के लिए उन्हें अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। इस स्थिति में अन्य दलों और अपक्ष सदस्यों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

सियासी जोड़तोड़ पर टिकी नजर

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि Rais Shaikh (सपा विधायक) एक बार फिर जोड़तोड़ की राजनीति कर सकते हैं, जैसा कि मेयर चुनाव के दौरान देखने को मिला था।

भाजपा भी बना रही रणनीति

दूसरी ओर, भाजपा भी चेयरमैन पद पर कब्जा करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंत में कौन सा गठबंधन बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज होता है।

चुनावी नतीजों पर टिकी निगाहें

इस चुनाव के परिणाम से भिवंडी की स्थानीय राजनीति की दिशा तय होगी। अब सभी की नजरें 15 अप्रैल को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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