नागपुर में आवारा कुत्तों का आतंक, 3 साल में 31.5% बढ़े डॉग बाइट केस; प्रशासन की बढ़ी चिंता

Nagpur Stray Dogs: नागपुर में आवारा कुत्तों के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 3 वर्षों में डॉग बाइट के मामलों में 31.5% की वृद्धि दर्ज हुई, जिससे नागरिकों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
Stray Dog Menace in Nagpur: Dog Bite Cases Rise by 31.5% in 3 Years; Administration's Concerns Mount
आवारा कुत्ते, डॉग बाइट, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Dog Bite Cases: नागपुर शहर में आवारा कुत्तों के हमलों की संख्या भयावह गति से बढ़ रही है जिसने नागरिकों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। पिछले 3 वर्षों में कुत्ता काटने (डॉग बाइट) के मामलों में 31.5% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में जहां 8,317 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 10,944 तक पहुंच गया।

क्यों बढ़ रहे हैं हमले ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों (अप्रैल-मई) और सर्दियों के मौसम में कुत्तों की आक्रामकता काफी बढ़ जाती है। दिसंबर 2025 शहर के लिए एक 'काला महीना' साबित हुआ था जब 5 वर्षों में सबसे अधिक 1,180 मामले दर्ज किए गए थे। इन महीनों में स्कूलों की छुट्टियां होने के कारण बच्चे मैदानों में अधिक खेलते हैं जिससे वे आसानी से शिकार बन जाते हैं। इसके अतिरिक्त खुले में फेंका जाने वाला कचरा और होटलों का चासी खाना कुत्तों की आबादी को तेजी से बढ़ाने का मुख्य कारण बन रहा है।

कागजों पर सिमटा नसबंदी और टीकाकरण अभियान

महानगरपालिका (मनपा) का पशु चिकित्सा विभाग हर साल भटकते कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण अभियान चलाता है लेकिन आंकड़ों की गति देखकर स्पष्ट होता है कि ये प्रयास नाकाफी है और जमीनी हकीकत से दूर हैं। देवीज वैक्सीन (एआरवी) की 5 खुराके कुत्ता काटने पर प्रत्येक मरीज को एंटी-देनी पड़ती हैं। यदि केवल 2025 के 10,944 मरीजों का हिसाब लगाया जाए तो 54,720 से अधिक खुराकों की आवश्यकता पड़ी। इससे मनपा के खजाने पर लाखों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 300 से 500 रुपये तक होती है जिससे गरीब मरीजों को काफी आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधी उम्मीद

सिटी में बढ़ती इन घटनाओं के बीच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पागल (रेबीज संक्रमित) कुत्तों को मारने के हालिया आदेश को नागपुर मनपा और नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवारा कुत्तों को बिल्कुल न छेड़ें और उन्हें खाना डालकर अपने करीब न बुलाएं, छोटे बच्चों को अकेले बाहर या सुनसान जगहों पर न जाने दिया जाए। इसी तरह से यदि कुत्ता काट ले तो घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं और 24 घंटे के भीतर रेबीज रोधी टीका अवश्य लगवाएं।

2026 के आंकड़े दे रहे हैं खतरे का संकेत

इस साल के शुरुआती आंकड़े और भी अधिक खतरनाक रुझान पेश कर रहे हैं। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) में ही 4,226 नागरिक आवारा कुत्तों के हमले में घायल हो चुके हैं। हर महीने 1,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। जनवरी में 1,060, फरवरी में 1,041, और मार्च में 1,023 लोगों को कुत्तों ने काटा। अप्रैल 2026 में यह संख्या 1,102 तक पहुंच गई जो एक चिंताजनक रिकॉर्ड है।

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